Monday, 29 May 2017

यूरिक एसिड ने जकड़ रखा है तो ये पोस्ट आपके लिए वरदान साबित होगी

यूरिक एसिड ने शरीर को जकड़ रखा है तो चिंता ना करे, ये पोस्ट आपके लिए वरदान साबित होगी, जरूर पढ़े और शेयर करे

➡ यूरिक एसिड (Uric Acid) हमारे जीवन में रोगों का घर :

यूरिक एसिड का बढ़ने की समस्या बडी तेजी से बढ़ रही है। आयु बढ़ने के साथ-साथ यूरिन एसिड गाउट आर्थराइटिस समस्या का होना तेजी से आंका गया है। जोकि लाईफ स्टाईल, खान-पान, दिनचर्या के बदलाव से भोजन पाचन प्रक्रिया के दौरान बनने वाले ग्लूकोज प्रोटीन से सीधे यूरिन एसिड में बदलने की प्रक्रिया को यूरिन एसिड कहते हैं। भोजन पाचन प्रक्रिया दौरान प्रोटीन से ऐमिनो एसिड और प्यूरीन न्यूक्लिओटाइडो से यूरिक एसिड बनता है। यूरिक एसिड का मतलब है, जो भोजन खाया जाता है, उसमें प्यूरीन पोष्टिकता संतुलन की कमी से रक्त में असंतुलन प्रक्रिया है। जिससे प्यूरीन टूटने से यूरिक एसिड बनता है। यूरिक ऐसिड एक तरह से हड्डियों जोड़ों अंगों के बीच जमने वाली एसिड़ क्रिस्टल है। जोकि चलने फिरने में चुभन जकड़न से दर्द होता है। जिसे यूरिक एसिड कहते हैं। शोध में यूरिक एसिड को शरीर में जमने वाले कार्बन हाइड्रोजन आक्सीजन नाइट्रोजन सी-5, एच-4, एन-4, ओ-3 का समायोजक माना जाता है। यूरिक एसिड समय पर नियत्रंण करना अति जरूरी है। यूरिक एसिड बढ़ने पर समय पर उपचार ना करने से जोड़ों गाठों का दर्द, गठिया रोग, किड़नी स्टोन, डायबिटीज, रक्त विकार होने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ जाती है। रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा को नियत्रंण करना अति जरूरी है।

➡ यूरिक एसिड (Uric Acid) के लक्षण :
पैरो-जोड़ों में दर्द होना।
पैर एडियों में दर्द रहना।

गांठों में सूजन

जोड़ों में सुबह शाम तेज दर्द कम-ज्यादा होना।
एक स्थान पर देर तक बैठने पर उठने में पैरों एड़ियों में सहनीय दर्द। फिर दर्द सामन्य हो जाना।
पैरों, जोड़ो, उगलियों, गांठों में सूजन होना।
शर्करा लेबल बढ़ना। इस तरह की कोई भी समस्या होने पर तुरन्त यूरिक एसिड जांच करवायें।

➡ यूरिक एसिड (Uric Acid) नियत्रंण करने के

आर्युवेदिक तरीके :

चोबचीनी का चूर्ण (यह आपको आयुर्वेदिक स्टोर या पंसारी की दुकान पर मिल जायेगा) आधा चम्मच सुबह खाली पेट और रात को सोने के समय पानी से लेने पर कुछ ही दिनों में यूरिक एसिड (Uric Acid) ख़त्म हो जाता है। यह उपाय बहुत चमत्कारी है क्योंकि की यह आजमाया हुआ है।

यूरिक एसिड बढ़ने पर हाईड्रालिक फाइबर युक्त आहार खायें। जिसमें पालक, ब्रोकली, ओट्स, दलिया, इसबगोल भूसी फायदेमंद हैं।
आंवला रस और एलोवेरा रस मिश्रण कर सुबह शाम खाने से 10 मिनट पहले पीने से यूरिक एसिड कम करने में सक्षम है।

टमाटर और अंगूर का जूस पीने से यूरिक एसिड तेजी से कम करने में सक्षम है।

तीनो वक्त खाना खाने के 5 मिनट बाद 1 चम्मच अलसी के बीज का बारीक चबाकर खाने से भोजन पाचन क्रिया में यूरिक ऐसिड नहीं बनता।

1 चम्मच शहद और 1 चम्मच अश्वगन्धा पाउडर को 1 कप गर्म दूध के साथ घोल कर पीने से यूरिक एसिड नियत्रंण में आता है।

यूरिक एसिड बढ़ने के दौरान जैतून तेल का इस्तेमाल खाने तड़के-खाना बनाने में करें। जैतून तेल में विटामिन-ई एवं मिनरलस मौजूद हैं। जोकि यूरिक एसिड नियत्रंण करने में सहायक हैं।

यूरिक एसिड बढ़ने पर खाने से 15 पहले अखरोट खाने से पाचन क्रिया शर्करा को ऐमिनो एसिड नियत्रंण करती है। जोकि प्रोटीन को यूरिक एसिड़ में बदलने से रोकने में सहायक है।

विटामिन सी युक्त चीजें खाने में सेवन करें। विटामिन सी यूरिक एसिड को मूत्र के रास्ते विसर्ज करने में सहायक है।

रोज 2-3 चैरी खाने से यूरिक एसिड नियत्रंण में रखने में सक्षम है। चेरी गांठों में एसिड क्रिस्टल नहीं जमने देती।
सलाद में आधा नींबू निचोड़ कर खायें। दिन में 1 बार 1 गिलास पानी में 1 नींबू निचैंड कर पीने से यूरिक एसिड मूत्र के माध्यम से निकलने में सक्षम है। चीनी, मीठा न मिलायें।

तेजी से यूरिक एसिड घटाने के लिए रोज सुबह शाम 45-45 मिनट तेज पैदल चलकर पसीना बहायें। तेज पैदल चलने से एसिड क्रिस्टल जोड़ों गांठों पर जमने से रोकता है। साथ में रक्त संचार को तीब्र कर रक्त संचार सुचारू करने में सक्षम है। पैदल चलना से शरीर में होने वाले सैकड़ों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। तेज पैदल चलना एसिड एसिड को शीध्र नियत्रंण करने में सक्षम पाया गया है।

बाहर का खाना पूर्ण रूप से बन्द कर दें। घर पर बना सात्विक ताजा भोजन खायें। खाने में ताजे फल, हरी सब्जियां, सलाद, फाइबर युक्त संतुलित पौष्टिक आहर लें।

रोज योगा आसान व्यायाम करें। योग आसान व्यायाय यूरिक एसिड को घटाने में मद्दगार है। साथ में योगा-आसान-व्यायाम करने से मोटापा वजन नियत्रंण रहेगा।
ज्यादा सूजन दर्द में आराम के लिए गर्म पानी में सूती कपड़ा भिगो कर सेकन करें।

यूरिक एसिड समस्या शुरू होने पर तुरन्त जांच उपचार करवायें। यूरिक एसिड ज्यादा दिनों तक रहने से अन्य रोग आसानी से घर बना लेते हैं।

➡ यूरिक ऐसिड (Uric Acid) बढ़ने पर खान-पान :
यूरिक एसिड बढ़ने पर मीट मछली सेवन तुरन्त बंद कर दें। नॉनवेज खाने से यूरिक एसिड तेजी से बढ़ता है। औषधि दवाईयां असर कम करती है।

यूरिक एसिड बढ़ने पर अण्डा का सेवन पूर्ण रूप से बंद कर दें। अण्डा रिच प्रोटीन वसा से भरपूर है। जोकि यूरिक एसिड को बढ़ता है।

बेकरी से बनी सही खाद्य सामग्री बंद कर दें। बेकरी फूड प्रीजरवेटिव गिला होता है। जैसेकि पेस्ट्री, केक, पैनकेक, बंन्न, क्रीम बिस्कुट इत्यादि।

यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त जंकफूड, फास्ट फूड, ठंडा सोडा पेय, तली-भुनी चीजें बन्द कर दें। जंकफूड, फास्टफूड, सोडा ठंडा पेय पाचन क्रिया को और भी बिगाड़ती है। जिससे एसिड एसिड तेजी से बढता है।
चावल, आलू, तीखे मिर्चीले, चटपटा, तले पकवानों का पूरी तरह से खाना बन्द कर दें। यह चीजें यूरिक एसिड बढ़ाने में सहायक हैं।

बन्द डिब्बा में मौजूद हर तरह की सामग्री खाना पूरी तरह से बंद कर दें। बन्द डब्बे की खाने पीने की चीजों में भण्डारण के वक्त कैम्किल रसायन मिलाया जाता है। जैसे कि तरह तरह के प्लास्टिक पैक चिप्स, फूड इत्यादि। हजारों तरह के बन्द डिब्बों और पैकेट की खाद्य सामग्री यूरिक एसिड तेजी बढ़ाने में सहायक है।

एल्कोहन का सेवन पूर्ण रूप से बन्द कर दें। बीयर, शराब यूरिक एसिड तेजी से बढ़ती है। शोध में पाया गया है कि जो लोग लगातार बीयर शराब नशीली चीजों का सेवन करते हैं, 70 प्रतिशत उनको सबसे ज्यादा यूरिक एसिड की समस्या होती है। यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त बीयर, शराब पीना बन्द कर दें। बीयर शराब स्वस्थ्य व्यक्ति को भी रोगी बना देती है। बीयर, शराब नशीली चीजें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

नाभि में इस तेल को डालने के चमत्कारिक फ़ायदे

नाभि में इन तेलों को डालने से ऐसे चमत्कारिक फ़ायदे होंगे जिसकी आपने कभी कल्पना नही की होगी

आप अपमी त्वचा को अच्छा बनाने के लिए और अपनी दर्दो के लिए और प्रजनन के लिए पता नहीं क्या-क्या नुस्खे अपनाते होंगे और आप कई साड़ी दवाओं का उपयोग भी करते होंगे  लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि पेट की नाभि पर तेल की कुछ बूंदें लगाने से आपको कितना फायदा हो सकता है क्या आप जानते है यहाँ तेल रगड़ने से जोड़ों के दर्द, घुटने का दर्द, सर्दी, जुकाम, नाक बहने और त्वचा संबंधी परेशानियों से निजात मिल सकती है.

यहाँ हम आपको बतायेंगे की किस प्रकार आप अपन नाभि इन तेलों को डाल कर दूर कर सकते हैं अपनी इन समस्याओ को जो आपके लिए मुश्किल भी नहीं हैं करना और जिसके द्वारा आपको इन चीजों से बहुत जल्दी आराम मिल जाएगा, तो चलिए जानते हैं कौन से है वो तेल जो करेंगे आपको रोग मुक्त.
नाभि में इन चीजों को लगाने के फायदे;

जोड़ो का दर्द करे सही:  फटे होंठ या जोड़ों का दर्द है अगर आप इन चीजों से परेशान है तो आपको ज़रूरत है सरसों के तेल की जिसके द्वारा आप अपनी इस समस्या से छुटकारा पा सकेंगे, अपने पेट की नाभि पर सरसों के तेल की कुछ बूंदें लगाएँ. हाँ यह आपको अजीब लग रहा होगा लेकिन ये प्राचीन औषधि बहुत फायदेमंद है.

सर्दी ज़ुकाम से राहत: क्या आपको सर्दी, जुकाम है, तो यह आपके लिए काफी फायदेमंद है, हममे से कुछ लोग ऐसे होते है जिन्हें बारो मॉस ज़ुकाम की शिकायत रहती है तो आपको बस इतना करना है की रुई के फ़ोहे को एल्कोहल में डुबोए और पेट की नाभि पर लगाएँ. बस हो गया. ये सर्दी और जुकाम की अचूक दवा है इससे आपका पुराने से पुराने ज़ुकाम ठीक हो जाएगा.

मासिक धर्म: लडकियों को मासिक धर्म में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं इन दिनों बहुत सारे होर्मोनेल चेंजेस भी होते है  जिसके कारण ना उनका मूड ठीक रहता हैं और उनका स्वस्थ्य लेकिन अगर आप मासिक धर्म होने वाली इन सम्सायो से बचना चाहती है तो रुई के फ़ोहे को ब्रांडी में भिगोएँ और इसे पेट की नाभि पर रखें, इससे आपको इन चीजों से मुक्ति मिलेगी.

मुहासे के लिए: लड़का हो फिर चाहे लड़की हो हर कोई मुहासे की समस्या से परेशान रहता हैं अगर आप भी इसी समस्या से परेशान हैं और कोई भी उपाय काम नहीं आ रहा हैं तो नीम के तेल की कुछ बूंदें पेट के बीच में डालकर और आस-पास मसाज करने से आपके कील-मुहाँसे ठीक हो सकते हैं, और आपकी त्वचा बेदाग़ वा सुंदर हो जायेगी.

चेहरे पर निखार: अगर आपका चेहरा दागरहित वा सुंदर हो तो क्या कहने ऐसा कहा जाता है कि बादाम के तेल की कुछ बूंदें पेट की नाभि पर लगाने से चेहरे पर निखार आता है और आपकी रंगत भी अच्छी होती हैं .

प्रज*नन क्षमता: नारियल या जैतून के तेल की कुछ बूंदें नाभि पर लगाएँ और धीरे-धीरे मसाज करें. इससे प्रज*नन क्षमता बढ़ती है और आपकी प्रजनन से रिलेटेड समस्याए भी खत्म होती हैं।

मुलायम त्वचा: हर किसी को बेबी सॉफ्ट त्वचा चाहिए क्या आपको स्वस्थ और मुलायम त्वचा चाहिए अगर हां  तो आपको बस गाय का घी नाभि पर लगाना होगा और आप भी पा सकेंगे बेबी सॉफ्ट त्वचा.

जानिए क्या होता है अमृत भोज

ये अद्भुत मिश्रण आपको हर रोग से दूर रखेगा, क्योंकि यह "अमृत" भोज है, जरूर अपनाएँ और शेयर करे

एक “आहार मिश्रण” का विवरण दिया जा रहा है । इस मिश्रण को “अमृत भोज” कहा जाता है क्योंकि यह अमृत के समान गुणकारी है-

सामग्री                                              • मात्रा

चना                                                   15 ग्राम
मूँगफली                                             10 ग्राम
मूँग                                                     8 ग्राम
मोठ                                                    6 ग्राम
मसूर                                                   6 ग्राम
तिल                                                    5 ग्राम

इन सबको एक साथ अंकुरित कर लें । यह अंकुरित मिश्रण पोषक तत्वों – प्रोटीन, एंजाइम, वसा आदि से भर्पूर होता है।

चाहे तों अदरक को बारीक कतर कर इसमे मिला लें । चाहें तो सलाद की चीजें, जैसे- प्याज, टमाटर, ककड़ी, गाजर, हरा धनिय, हरी मिर्च, चकुंदर, मूली, पत्ता गोभी, पालक के पत्ते और नीम्बू आदि भी मिला सकते हैं । इन सबको बारीक काट कर अंकुरित अमृत भोज में मिला लें और नीम्बू निचोड़ लें । पिसा हुआ सेंधा नमक एवं पिसी काली मिर्च बुरक लें और खूब चबा चबा कर खायें । प्रारम्भ में कुछ दिन इसे पचाने में कठिनाई होगी क्योकि कच्चा आहार पहले अंदर आहार प्रणाली की शुद्धि करने और आँतों की कार्य पद्धति में थोड़ा परिवर्तन करने का काम करता है । इसलिये शुरू के 5-6 दिन तक इसके सेवन से पेट में भारीपन का अनुभव हो तो कोई चिंता न करें । एक सप्ताह बाद हमारी पाचन प्रणाली इस अपक्व कच्चे आहार को पचाने की अभ्यस्त हो जाती है । इस “अमृत भोज” का सेवन किसी भी आयु वाला, किसी भी ऋतु में, उचित अपनी पाचन शक्ति के अनुकूल मात्रा में कर सकता है । गर्भवती महिलाओं के लिये तो यह बहुत उपयोगी है।

विशेष नोट :- यह लेख अपने समय की बहुत प्रमुख आयुर्वेद पत्रिका “निरोगधाम” में वर्ष 1989 में अक्टुबर माह में छपा था, वहीं से यह लेख लिया गया है । इस लेख के मूल लेखक को ही इसका श्रेय जाता है ।
ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें इसलिये शेयर जरूर कीजिये ।

Sunday, 28 May 2017

इस पेड़ की छाल की इस्तेमाल करने से होंगे ये फ़ायदे

इस पेड़ की छाल को जलाकर सिर्फ़ सूँघने मात्र से गठिया और जोड़ो का दर्द चला जाएगा, ये अद्भुत उपाय बहुत कारगर साबित हो रहा है

अर्थराइटिस यानी गठिया और जोड़ों का दर्द ऐसी बीमारी है,जिसके होने की कोई निश्चित वजह बता पाना बहुत ही मुश्किल है। जब हड्डियों के जोडो़ में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनता है। रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है। इस रोग में जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है, इसलिए इस रोग को गठिया कहते हैं।

जोड़ों के दर्द में धूप से ऐसे पाएं राहत :

लोबान या धूप का भारत में एयर फ्रेशनर के रूप में और पूजा-पाठ में इस्तेमाल किया जाता है। बोसवेलिया सेराटा पेड़ की छाल से बनने वाली धूप का उपयोग परफ्यूम और एसेंशियल ऑयल के लिए भी किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसके धुएं को सूंघना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।
धूप में एंटी-इन्फ्लैमटोरी गुण होते हैं और ये गठिया के दर्द से राहत के लिए उपयोगी है। जर्नल आर्थ्राइटिस रिसर्च एंड थेरेपी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, कुछ लोगों को बोसवेलिया सेराटा पेड़ का रस दिया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन लोगों को जोड़ों के दर्द में राहत मिली थी और सात दिन के भीतर दर्द से छुटकारा मिला था। धूप में 3-ओ एसिटाइल-11-कीटो-बीटा-बोस्वेल्लिक एसिड यौगिक होते हैं, जो बेचैनी और दर्द को कम करने में सहायक हैं। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि धूप का रस जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज यानि नरम हड्डी को खराब होने से रोकता है

गठिया के लिए धूप के फायदे :

केवल बोसवेलिया पेड़ से ही नहीं बल्कि इस पेड़ से बनने वाली धूप से ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटी गठिया के लक्षणों को दूर करने में मदद मिलती है। इसमें मौजूद बोस्वेल्लिक एसिड तत्व से 5-लिपोक्सीजेनस की गतिविधि को बाधित करने में मदद मिलती है। ये एक एंजाइम है, जो दर्द का कारण बनता है। अध्ययनों के अनुसार, इसका कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं है।

ऐसे करें इसका इस्तेमाल :

धूप की गोलियां और और कैप्सूल बाजार में उपलब्ध होते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि गठिया के इलाज के लिए ये हर्बल उपचारों में से एक है। इसलिए इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

निम्बू की पत्ती के चमकारी फायदे

इसकी पत्ती सिर्फ सूंघने से सिरदर्द का जड़ से सफाया, पीने से मर जायेंगे पेट के कीड़े और पिचकारी मारने से बंद हो जायेगा नाक से बहता रक्त, जानिए कैसे?

➡ चमत्कारी निम्बू पत्ती (Lemon Leaf) :

आज हम आपको निम्बू की पत्ती ऐसे 3 चमत्कारी फायदे बताएँगे जिसे सिर्फ सूंघने से सिरदर्द का जड़ से सफाया, पीने से मर जायेंगे पेट के कीड़े और पिचकारी मारने से बंद हो जायेगा नाक से बहता रक्त, तो आइए जानते है इसके बारे में। नींबू का अनोखा गुण यह है कि इसकी खट्टी खुशबू खाने से पहले ही मुंह में पानी ला देती है। चांट हो या दाल कोई भी व्यंजन इसके प्रयोग से और भी सुस्वादु हो जाता है। यह फल खट्टा होने के साथ-साथ बेहद गुणकारी भी है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि नींबू के पत्ते भी बहुत उपयोगी होते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं नींबू के पत्तों के कुछ ऐसे ही रामबाण प्रयोगों के बारे में-

➡ कृमि रोग (पेट के कीड़े) :

10 ग्राम नींबू के पत्तों का रस (अर्क) में 10 ग्राम शहद मिलाकर पीने से 10-15 दिनों में पेट के कीड़े मरकर नष्ट हो जाते हैं। नींबू के बीजों के चूर्ण की फांकी लेने से कीड़ों का विनाश होता है।

➡ सिरदर्द या माइग्रेन :

नींबू के पत्तों का रस निकालकर नाक से सूंघे, जिस व्यक्ति को हमेशा सिरदर्द बना रहता है, उसे भी इससे शीघ्र आराम मिलता है। यह प्रक्रिया लगातार कुछ दिनों तक करने से ऐसे परिणाम मिलेंगे की आप दाँतो तले उंगलियां दबा लेंगे। हमारे द्वारा किये कुछ पीड़ितों पर यह प्रयोग इतना कारगर निकला की उनकी सिरदर्द/माइग्रेन की समस्या का जड़ सफाया हो गया है।

➡ नाक से खून आना :

ताजे नींबू का रस निकालकर नाक में पिचकारी देने से नाक से खून गिरता हो, तो बंद हो जाएगा।

सिर्फ 1 पिस्ता रोज खाने के बेमिसाल फ़ायदे

सिर्फ 1 पिस्ता रोजाना खाएँ क्योंकि इसके 9 चमत्कारिक फ़ायदे जानकर आप दंग रह जायेंगे

सूखे मेवों में काजू और आखरोट से सबसे अधिक पौष्टिक और ताकतवर होता है पिस्ता। पिस्ता आपकी सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। खाने में स्वादिष्टि होने के साथ-साथ इसमें वसाए प्रोटीन और फाइबर की अधिक मात्रा होती है। पिस्ता आपको कई बीमारियों बचाता भी है और कई रोगों को ठीक भी कर देता है। इसलिए वैदिक वाटिका आपको बता रही है पिस्ता खाने से मिलने वाले फायदों के बारे में।

➡ पिस्ता के अद्भुत फायदे :

आंखों की सेहत के लिए : उम्र बढ़ने के साथ आंखों की कमजोरी और बीमारी बढ़ने लगती है। एैसे में आप नियमित पिस्ता खाते हैं तो आपकी आंखों पर किसी भी तरह का प्रभाव नहीं पड़ेगा। आपकी आंखे बुढ़ापे तक स्वस्थ और निरोगी रहेंगी।

सूजन होने पर : यदि आपके शरीर में सूजन रहती हो तो पिस्ता का सेवन करें। इसमें मौजूद विटामिन-ए और विटामिन-ई सूजन को घटाते हैं।

संक्रमण का प्रभाव : शरीर में संक्रमण के खतरे को रोकता है पिस्ता। और शरीर को हर तरह से संक्रमण से लड़ने में सक्षम बनाता है।

कैंसर से बचाव : जो लोग बचपन से पिस्ता खा रहे होते हैं उन्हें भविष्य में कैंसर की बीमारी नहीं लगती है। पिस्ता में बीटा कैरोटीन होता हे जो कैंसर से लड़ता है। कैसर से परेशान लोगों को पिस्ता खाना चाहिए।
शरीर के अंदर जलन : शरीर के अंदर किसी भी तरह की जलन हो रही हो चाहे वह पेट की जलन या छाती की जलन। आप पिस्ता का सेवन करें।

बनाए सुंदर चेहरा : सुंदर चेहरे के लिए पिस्ता किसी प्राकृतिक औषधि से कम नहीं है। उम्र के बढ़ते प्रभाव को रोकना और झुर्रियों को चेहरे से साफ करना पिस्ता में मौजूद गुण आसानी से करते हैं। पिस्ता खाने से चेहरे की त्वचा टाइट होती है।

तेज दिमाग : काजू, बादाम से भी अधिक पौष्टिक होता है पिस्ता। पिस्ता खाने से दिमाग तेज होता है और इंसान की स्मरण शक्ति तेज होती है। इसलिए बच्चों को पिस्त जरूर खिलाएं।

डायबिटीज : पिस्ता डायबिटीज यानि कि मधुमेह को बढ़ने से रोक देता है। पिस्ता में फास्फोरस उचित मात्रा में होता है जिससे शुगर निंयत्रण में रहता है।

ब्लड प्रेशर यानि रक्तचाप की समस्या : यदि आपका रक्तचाप अचानक से बढ़ता व घटता रहता हो तो आपके लिए पिस्ता का सेवन जरूरी है। पिस्ता रक्तचाप को नियंत्रण में रखता है।

हल्दी,गुड़ और गाय के घी के मिश्रण से बनाये हड्डी के जोड़ को मजबूत

हल्दी, गुड़ और गाय के घी का ये अद्भुत मिश्रण टूटी हुई हड्डी को जोड़ कर शरीर को फौलाद बना देगा, इसको सभी अपना सकते है


➡ हल्दी, गुड़ और गाय के घी का अद्भुत मिश्रण :

आज हम आपको जो उपाय बताने जा रहे है उसे सिर्फ टूटी हड्डी वाला ही नही बल्कि साधारण व्यक्ति जिनकी हड्डी ठीक है वो भी अपना सकते है जिससे शरीर बलवान, पुष्ट और फौलाद बन जायेगा। आइये जानते है इसके बारे में।

हड्डी के टूटने पर रोज हल्दी का सेवन करने से लाभ मिलता है। एक प्याज को पीसकर एक चम्मच हल्दी मिलाकर कपड़े में बांध लें। इसे तिल के तेल में रखकर गर्म करें और इससे फिर सेंक करें। कुछ देर सेंकने के बाद पोटली खोलकर दर्द वाले स्थान पर बांध दें।

हड्डी टूटने पर हल्दी का रोज सेवन करने से लाभ होता है। हड्डी टूट जाने पर प्लास्टर लगाकर एक बार की टूटी हड्डी तो जल्द ही ठीक हो जाती है मगर जो हड्डी बार-बार टूटी हो उसमें जगह बनने से पानी जमने, सड़ने की संभावना हो सकती है। पिसी हुई हल्दी 1 छोटी चम्मच, एक चम्मच-भर पुराना गुड़ जोकि 1 साल पुराना हो और देशी घी 2 चम्मच-भर लेकर तीनों को 1 कप पानी में उबालें। जब उबलते-उबलते पानी आधा ही रह जाये, तब इसे थोड़ा ठण्डाकर पी जायें। इस प्रयोग को केवल 15 दिन से 6 महीने तक करने से बहुत अच्छा लाभ नज़र आ जायेगा।

और बार बार हड्डी टूटने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।।

डेंगू बुखार से छुटकारा पाने के लिए 10 रामबाण घरेलू नुस्खे

ये 10 चीज़े खाने से डेंगू की औकात नही की वो आपको छू पाये, जरूर पढ़े और शेयर करे

➡ डेंगू (Dengue) :

आजकल देश के अनेक हिस्सों खासकर दिल्ली में डेंगू बहुत फैला हुआ है। डेंगू होने पर बुखार बहुत तेजी से बढता है और आपके शरीर में खून में प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं। और साथ ही शरीर में कमजोरी बढ़ती चली जाती है।और कई बार तो यह जानलेवा भी हो सकती है।

यदि आप इससे बचे रहना चाहते है तो बॉडी की इम्यूनिटी इंप्रूव करना जरूरी है। आज हम आपको ऐसे ही 10 फूड्स के बारे में जानकारी दे रहे हैं जिन्हें खाने से डेंगू का मच्छर यदि काट भी लेता है तो प्लेटलेट्स की संख्या कम नहीं होगी।

➡ आइये जाने इन 10 चीज़ों के बारे में जो डेंगू से शरीर की रक्षा करती है :

कद्दू का सेवन : कद्दू में विटामिन अ और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है जिस कारण शरीर की इम्यूनिटी इंप्रूव होती है और डेंगू से बचाव होता है।

नारियल पानी : अपने दैनिक जीवन में कम से कम 1 नारियल पानी जररू पियें क्योंकि इसमे एलेक्ट्रोलाईट  होते हैं जो आपके बढ़ाते हैं।

अदरक का सेवन : अदरक का सेवन जरुर करें चाहे सब्जी में चाहे थोडा सा टॉफ़ी जितना चूस लीजिये इसमें एंटी बैक्टीरियल (Anti-Bacterial) गुण होते हैं जो डेंगू के असर से बचाते हैं।

पालक का सेवन : अपने भोजन में एक समय 1 कटोरी पालक की सब्जी के सेवन जरुर करें क्योंकि इसमे विटामिन के परचुर मात्रा में होता है जो खून में प्लेटलेट्स बढ़ाने में मदद करता है।
टमाटर का सेवन : टमाटर में विटामिन सी अधिक मात्रा में होता है जो आपको डेंगू के काटने से होने वाली कमजोरी को महसूस नहीं होने देता और एनर्जी भी देता है

तुलसी : तुलसी का सेवन भी आपकी डेंगू से रक्षा करता है इसमे एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं जो शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं।

संतरा या आंवला : रात को सोते समय किसी मिट्टी का बर्तन या कांच के बर्तन में थोडा सा सुखा आंवला पानी में भिगो दें और सुबह खली पेट उस पानी को छान कर पी लें आपकी इम्यूनिटीपॉवर बढ़ जायेगी क्योंकि आंवला और संतरा दोनों ही विटामिन सी से भरपूर हैं या एक गिलास संतरे का जूस हर रोज़ पियें।

हल्दी का सेवन : हल्दी में करक्यूमिन (Circumin) होता है जो हमारी बॉडी का मेटाबोलिज्म बढाता है जिस से डेंगू से बचाव होता है।

कीवी फल : कीवी में सभी फलो के मुकाबले ज़्यादा विटामिन पाये जाते हैं, जिस कारण इसे विटामिन का राजा भी कहते हैं। कीवी फाइबर, विटामिन ई , विटामिन सी  , एंटीआक्सीडेंड , फ़ोलिक एसिड कैरोटेनाइड्स और कई प्रकार के मिनिरल्स भी पाये जाते हैं जो डेंगू में हमारे शरीर के लिए अमृत समान है।

मेथी के पत्ते : मेथी के पत्ते बुखार कम करने में सहायता करते हैं।और आसानी से नींद लाने में मदद करते हैं। मेथी की पत्तियों को पानी में भिगोकर उसका पानी पीया जा सकता है। या इसके स्थान पर मेथी पाउडर को भी पानी में घोलकर पी सकते हैं।

लहसुन खाने के 8 बेहतरीन फ़ायदे

सुबह-सुबह रोजाना खाली पेट लहसुन खाने के है 8 बड़े फायदे, जरूर अपनाएँ और शेयर करे

➡ लहसुन (Garlic) :

लहसुन का इस्तेमाल हम खाने का स्वाद बढाने में किया जाता है। इसके इस्तेमाल से खाना का टेस्ट बदल जाता है। लेकिन आप जानते है कि लहसुन की एक कली हमारे शरीर को कई बीमारियों से बचाता है। ये आपके खाने का स्वाद ही नहीं बढाता है बल्कि आपके सेहत का भी ख्याल रखता है। अगर आप इसकी एक कली का सेवन खाली पेट करते है तो यह हमारे शरीर के लिए किसी अमृत से कम नहीं है।

आयुर्वेद में लहसुन के लिए कहा जाता है कि इसके सेवन से आप जवान बने रहेगे। साथ ही यह कई बीमारियों से जैसे कि बवासीर, कब्ज, कान का दर्द, ब्लड प्रेशर, भूख बढाने आदि में किया जाता है। लहसुन एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक एंटीबायोटिक की तरह काम करता है।

➡ लहसुन (Garlic) के 8 बड़े फायदे :

दांत दर्द से दिलाएं निजात : अगर आपके दांतो में दर्द हो रहा हो तो लहसुन की एक कली काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इसमें एन्टीबैक्टिरीअल और दर्दनिवारक गुण दांत के दर्द से राहत दिलाता है। इसके लिए इसका एक कली पीसकर दांत के दर्द के जगह पर लगा दें।

हाई ब्लड प्रेशर को करें कंट्रोल : इसका सेवन करने से न केवल ब्लड सर्कुलेशन को नियमित करता है, बल्कि दिल से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है।

पेट संबंधी समस्या को दूर : लहसुन पेट संबंधी समस्याओं के लिए काफी फायदेमंद है। साथ ही इसका सेवन करने से आपके पेट में मौजूद विषाक्त पदार्थों को साफ कर देता है।

नसों में हो रही झनझनाहट को करें कम : एक शोध में ये बात सामने आई कि खाली पेट लहसुन का सवन करने से नसों में झनझनाहट की समस्या दूर हो जाती है।

कोलेस्ट्रॉल को करें कंट्रोल : अगर आप लहसुन का सेवन काली पेट करेंगे चो इससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

भूख बढाएं : अगर आपको भूख कम लगती हो तो लहसुन का सेवन करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। यह आपके डाइजेस्टिव सिस्टम को ठीक करता है जिससे आपकी भूख भी बढ़ा जाती है। है। कभी-कभी आपके पेट में एसिड बनने लगता है, लेकिन इसका सेवन करने से यह पेट में एसिड बनने से रोकता है। जिससे आपको तनाव से भी निजात मिल जाता है।
श्वसन तंत्र को करें मजबूत : लहसुन आपकी श्वसन तंत्र के लिए काफी फायदेमंद है। इस का सेवन करने से अस्थमा, निमोनिया, ज़ुकाम, ब्रोंकाइटिस, पुरानी सर्दी, फेफड़ों में जमाव और कफ आदि से निजात और बचाव होता है।

दिल को स्वस्थ रखता है : धमनी कभी-कभी अपना लचीलापन खो देते हैं तब लहसुन उसको लचीला बनाने में बहत मदद करता है। फ्री ऑक्सिजन रैडिकल्स से हृदय की रक्षा करने में भी मदद करते हैं। सल्फर यौगिक रक्त-कोशिकाओं को बंद होने से बचाता है।

लटकते पेट को अंदर के घरेलू नुस्खे

लटकते हुए पेट को करना है अंदर तो ये उपाय आपके लिए किसी चमत्कार से कम नही होंगे

भारत में मोटे लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। आज करीब 4 करोड़ 10 लाख ऐसे लोग भारत में मौजूद हैं, जिनका वजन सामान्य से कहीं ज्यादा है। अधिकांश लोग शुरुआत में मोटापा बढ़ने पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन जब मोटापा बहुत अधिक बढ़ जाता है तो उसे घटाने के लिए घंटों पसीना बहाते रहते हैं।

मोटापा घटाने के लिए खान-पान में सुधार जरूरी है। कुछ प्राकृतिक चीजें ऐसी हैं, जिनके सेवन से वजन नियंत्रित रहता है। इसलिए यदि आप वजन कम करने के लिए बहुत मेहनत नहीं कर पाते हैं तो अपनाएं यहां बताए गए छोटे-छोटे उपाय। ये आपके बढ़ते वजन को कम कर देंगे।

ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।

केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाए गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।
रोज पत्तागोभी का जूस पिएं। पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है।

पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम हो जाती है।

दही का सेवन करने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।
छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।
आंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लेंं। कमर एकदम पतली हो जाएगी।

मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।

एक चम्मच पुदीना रस को 2 चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से मोटापा कम होता है।

सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है। पुदीने की चाय बनाकर पीने से मोटापा कम होता है।

खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।

सुबह उठते ही 250 ग्राम टमाटर का रस 2-3 महीने तक पीने से पेट अंंदर हो जाता है।