Tuesday, 18 October 2016

आलसी होना सबसे बड़ा सदगुण


आलसी होना सबसे बड़ा सदगुण

गुणों, सदगुणों ,विशेष गुणों, आति विशेष गुणों आदि गुणों के बारे में आप सबने सुना होगा | इनमे सच्चाई ,अच्छाई ,ईमानदारी ,परोपकार , सहनशीलता ,नम्रता , उदारता ,दयालुता ,कर्तव्यनिष्ठा ,कर्तव्यपरायणता फलाना  ढेमाका आदि का नाम प्रमुखता से लिया जाता  है  |  पर मैं यहाँ  एक ऐसे अति विशिष्ट गुण के बारे में बताउंगी  जिसके बारे में शायद ही कभी किसी ने सुना हो ,यह गुण है आलसीपन का गुण |  आज के परिपेक्षय में अगर बात करें तो आलसी होना या बनना किसी सदगुण से कम नहीं  है | आज  के भागदौड़ भरे माहौल में लोगों को आलसी होने की  फुर्सत नहीं है | रोज़ के टीवी चैनलों, अख़बारों, मैगज़ीनों और गूगल आदि पर आपने अनेकों तरह के  प्रोडक्टस और उससे होने वाले फायदों के बारे में देखा और सुना होगा, नुश्खे भी आज़माए होंगे, पर क्या आपने कभी कही आलसी होने के फायदो के बारे में देखा या सुना है ,नहीं ना | आज मै आपको बताउंगी कि आलसी होने के क्या – क्या फायदे हो सकते है | और आप इनसे होने वाले लाभों को निकट भविष्य में कैसे इस्तेमाल कर सकते है |
आलसी होने का सबसे बड़ा फायदा है कि मेहनत नहीं करनी  पड़ती  | दूसरा फायदा है कि आलसियों  को कभी भी किसी भी विपरीत  परिस्थिति में भी नींद कि गोली खाने कि जरूरत ही नहीं पड़ती है , क्योकि वे  बिना गोली के ही दिन – रात सोया करते है | आलसियों कि ये आदत हर प्रान्त, हर शहर ,हर तबके  में एक सी ही  पायी जाती है ,चाहे आप कश्मीर चले जायें या कन्याकुमारी |
अगर आपको आलसी टाइप के लोगों  की पहचान करनी हो तो सबसे पहले यह देखिये की वह  कौन सा व्यक्ति है जो  दिन के आठो पहर जम्हाई लेता रहता है | ऐसे सख्श किसी भी बात को गम्भीरता से  नहीं लेते | चाहे कहने वाले इनके पिता हो या बॉस , इनपर कोई असर नहीं पड़ता | सही मायने में ये काम टालू महाराज की श्रेणी में आते है | इनके चेहरे हर सिथति ,परिस्थिति  में सदा एक सा भाव होता है मतलब हॅसना, रोना, गुस्सा करना, गुनगुनाना जैसी आदतो से इनका कोई लेना देना नहीं होता | इनके चेहरा प्रश्नवाचक चिन्ह कि तरह झलकता है | भले ही इनसे कोई प्रश्न न पूछा गया हो | ऐसे आलसी  महत्मा एमोशनलेस होते है आप कुछ भी बोलते रहे इनपर कोई असर नहीं होता ,ऐसा लगता है कि अगर  कोई इनके सामने एटम बम या कोई अन्य खतरनाक बम भी जलता हुआ छोड़ जाए तो वे पहले इसके फटने पर ही  शंका जाहिर करेंगे या फिर इसके फटने का इंतेज़ार करेंगे क्युकि अगर न फटा तो इनका भागना कहीं व्यर्थ न हो जाये | ऐसे लोग कभी आत्मदाह या आत्महत्या की नहीं सोचते, क्युकि  इतना बड़ा कदम एक आलसी कभी नहीं उठा सकता | ऐसे इंसानो में नाममात्र भी अवसाद या चिंता नहीं झलकती , क्युकि अगर चिंता  होती तो  आलसी भला आलसी  क्यों कहलाते  |
वैसे तो इनकी तादाद पूरे भारत वर्ष में अधिकता से है लेकिन सरकारी दफ्तरों में ये बहुतायत मात्रा में पाये जाते है | देखा जाये तो ऑफिसो में आलसी होने के अपने फायदे है | ज्यादातर लोग सोचते है कि  आलसियों को कोई काम इसलिय नही  सौपता ,क्युकि वे करते ही नहीं | आप बस आलसी बने रहो, किसी की मज़ाल नहीं कि आपको काम की जिम्मेदारी सौपने के लायक समझने कि भूल करें | अतः जब कोई काम देगा नहीं तो काम रहेगा नहीं और न ही आपको ये मलाल रहेगा कि किसी ने आपको काम दिया और आपने  किया नहीं |  और जब  काम नहीं तो  टेंशन नहीं | आपसब जानते है कि टेंशन से मानव जाति का कितना नुकसान हो रहा है | बाल पकना ,असमय बुढ़ापा ,अनिद्रा आदि सभी बीमारियाँ टेंशन कि ही उपज है | वो तो शुक्र है आलसियों का जिन्हे इसतरह कि बीमारियाँ  छू नहीं सकती |  यही कारण है कि  दफ्तरों में लोग मुफ्त में  आलसी  बने रहने के नायब  नुश्खे आजमाया करते है  | कुछ दफ्तरों में तो आधे से ज्यादा  स्वाभाविक रूप से  आलसी होते है पर  कुछ वहाँ पहुचते ही बन जाया करते  है | आलसियों का मन किसी काम में नहीं लगता बस एक काम में लगता है सोने और खाने में | आप तो जानते है की सोना और खाना  कितना जरुरी है हमारी सेहत के लिए |
आप सोचे अगर कोई आलसी न होता तो हमारे देश का क्या होता ? एक तो सभी के बाल टेंशन से पक जाते और तो और काम के बोझ से लोग असमय मर ही जाते, तब शायद दुनिया जल्दी ख़त्म हो जाती इसलिय हमे आलसियों का शुक्रिया अदा करना चाहिए | इनलोगो ने हमारे देश पर कितने अहसान किये है अगर ये न होते तो हमारे देश में इतने सारे आविष्कार न होते | इतनी मशीने ,टेक्नोलॉजी सब इन आलसियों की ही देन है | सोचिये अगर  हम कन्याकुमारी से दिल्ली तक का सफ़र पैदल करने को तैयार रहते तो भला ट्रैन  और एयरोप्लेन की क्या जरुरत थी | वो तो भला हो  तो उन आलसियों का जिन्होंने हमे पैदल  चलने से बचा लिया  | अगर देश में आलसियों की कमी हो जाये तो पता है क्या होगा …हमारे देश की आधी से अधिक जनसँख्या कम हो जायेगी ,क्योकि आधी  से अधिक  आबादी इन्ही की है |
बड़े दुःख और खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि आज के तनाव और अवसाद  भरे जीवन में आलसी होना ,आलसी बनना और आलसी कहलाना जैसा अतिसुकून भरा अहसास खोता जा रहा है  | ऐसे माहौल में आलसी बनना इतना  आसान नहीं है | आज के वर्किंग माहौल में  निठल्ला ,सुस्तैन  सेठ ,कामचोर,आलसी महाराज ,सॊतुमल आदि  जैसी विशेष उपाधियाँ लोगो को नहीं मिल पा रही है | आलसी लोगों का जीवन के प्रति कोई विशेष नजरिया न होने की वजह से ये भविष्य के बारे में चिंतित नहीं रहते है न ही कोई फ़िक्र इन्हे छू पाती है , अतः ये लोग पूरी पृत्वी पर सबसे सुखी इंसान के रूप में निवास करते है जो आज के कलयुग में और किसी दूसरे  श्रेणी में आने वाले इंसानो को नसीब नहीं है |
आज के माहौल में अगर आपको कोई आलसी कहता है तो आप खुद को खुशकिस्मत समझिये क्युकि यही एक ऐसा अहसास है जो आपको यह बताता है की आप खाली है | और खालीपन  का अहसास कितना सुकून भरा होता है जो शायद  आज दुनिया की सर्वोत्तम ऊचाइयों पर भी  आपको न  मिले  |
एक और अच्छी बात होती है आलसियों में वे कभी कोई गलत काम नहीं कर सकते | वे चाहे भी तो आतंकवादी या चोर नहीं बन सकते | क्युकि इसके लिए भी मेहनत की जरुरत होती है | हमारी समझ से सरकार की तरफ से  आलसियों को पूर्ण सुरक्षा मिलनी चाहिए | क्यूकि ये लोग बड़े निर्दोष और घर के एक कोने में रहने वाहे शांतचित प्राणी होते है | इनका दुनियाभर के कामों से कोई वास्ता नहीं रहता | अगर कोई दुषमन इनपर हमला बोल दे तो, ये इतना लुज्ज पुज्ज और नाज़ुक होते है कि  अपना बचाव भी नहीं कर सकते | अतः हमारे समाज को चाहिए  कि ऐसे आलसियों कि देखभाल करें और इनसे प्रेरणा लें कि जींदगी कैसे  जीये | क्यूकि ये जिंदगी को कभी बोझ नहीं समझते बल्कि जिंदगी इन्हे बोझ समझती है |
अंत में, आइये आलसी बनने कि जीतोड़ कोशिश कि जाये और आलसियों कि संख्या में इज़ाफ़ा लाकर इस देश को स्वस्थ,अवसादमुक्त नागरिक देने कि कोशिश करें |

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