Sunday, 13 November 2016

मोटापा क्या है? उसके मानव जीवन पर प्रभाव

मोटापा क्या है? उसके मानव जीवन पर प्रभाव



मोटापा क्या है?:- आम तौर पर किसी पुरूष या महिला का अपने आदर्श वजन (हाईट, उम्र) के अनुसार अधिक होना मोटापा कहलाता है किंतु चिकित्सा विज्ञान के अनुसार ओवेसिटी या मोटापा वह मेडिकल स्थिति होती है जिसमें बाॅड़ी फेट अधिक मात्रा में बढ़ जाता है जिसके बढ़ने से मानव शरीर में विपरीतगामी परिणाम और रोग उत्पन्न होने लगते है। आॅपरेशनल परिभाषा के रूप में कहा जा सकता है कि मोटापे में बाॅडीमास 30 से अधिक हो जाता है।
उक्त सभी बातें स्पष्ट करती है कि मोटापे में शरीर में चर्बी बढ़ने लगती है और व्यक्ति का भार भी बढ़ने लगता है।
मोटापे का मानव जीवन पर प्रभाव:- वर्तमान में मोटापे के कारण या अतिभार के कारण मानव स्वास्थ्य पर अनेकों कुप्रभाव पड़ रहे है जो भारत ही नहीं विश्वभर के मानव समाज के लिये खतरा बन चुके है। लाखों लोग जिनमें युवा और वृद्ध दोनों शामिल है इस मोटापे के भार को सहने में अक्षम हो रहे हैं। मोटापा अपने आप में एक रोग है जो अन्य रोगों को निमंत्रण देता है। इससे मानव मात्र की जीवन रेखा छोटी (अल्प) होने लगती है क्योंकि यह एथ्रोस्केलोरिस, कोरोनरी हार्ट डिसीज, उच्च रक्तचाप, मधुमेह व विभिन्न शारीरिक व फीजियोलाॅजिकल, ग्रेस्ट्रोइन्टेन्स्टीनाल रोग, सेक्सुअल डायफंक्शन व आत्मग्लानि जैसे रोगों को जन्म देती है जो दर्द, हार्ट अटैक, स्ट्रोक आस्टियो आर्थराईटिस जैसे रोगों की जननी होती है।
मोटापे और अतिभार का असर होने से कुछ क्राॅनिक रोग मानव मात्र में पैदा हो सकते है चाहे वे पुरूष हो, महिला हो या बच्चे हो। यह रोग आयु भी नहीं देखता है यह रोग बच्चे बूढे़ जवान सभी को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। मोटापे के कारण निम्नलिखित क्राॅनिक रोगों से मनुष्य जाति शिकार हो सकती है:-
डायबिटीज या मधुमेह:- लगभग 25ः डायबिटीज टाईप-2 के केस मोटापे या अधिभार के कारण होते है। टाईप-2 डायबिटीज रोग होने की ऐसे मरीजों में अधिक संभावनाएँ होती है। मधुमेह रोग के कारण लोगों में शारीरिक क्षमताएँ कम होने लगती है जिससे वे ब्लड़ शुगर को नियंत्रित नहीं कर पाते है जिसका परिणाम शीघ्र (असमय) मृत्यु के रूप में होता है। हृदय रोग, किडनी रोग, स्ट्रोक, अंधत्व, स्टेस्टीसिटी आदि मधुमेह के शीघ्रगामी परिणाम होते है और लोगों में वसा बढ़ने की गति ऐसी दशा मंे दोगुनी हो जाती है।
कैंसर:- कुछ प्रकार के कैंसर आॅबेसिटी एपीडामिक के कारण भी होते है। विशेषकर महिलाओं मंे मोटापा व अधिक भार कई क्राॅनिक रोगों का कारण बन जाता है जैसे हृदय रोग, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, आस्टियोआंर्थराईटिस कुछ विशेष प्रकार के कैंसर जैसे कोलन, ब्रेस्ट आदि हो जाते है।
स्वीप एपनोआ:- इस रोग के अधिभार के कारण गंभीर लक्षण मोटे लोगों में देखने को मिलते है। इस रोग में मोटे व्यक्ति की श्वसन क्रिया कुछ समय के लिये रूक जाती है ऐसा सोते समय होता है। विशेष रूप से दिन के समय सोने पर यह अधिक होता है और इसके कारण हार्ट फेल तक हो जाता है। यह समस्या शारीरिक अतिभार के कारण उत्पन्न होती है।
आस्टियो आर्थराईटिस:- मोटापा और अतिभार मिलकर कद संबंधी रिस्क को जन्म देते है। अतिभार जोड़ों पर अधिक दबाव डालता है जिससे हड्डियाँ कमजोर होकर मुड़ने लगती है। निचली पीठ, हिप्स (कुल्हों), घुटनों पर इसका प्रभाव अधिक होता है और ये आर्थराईटिस के गिरफ्त में आ जाते है।
गाऊट:- गाऊट एक प्रकार का जोड़ों का रोग है जो उच्चस्तरीय युरिक एसिड के कारण होता है जो रक्त में होता है। कभी-कभी यह एसिड ठोस पत्थर या छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में उत्पन्न कर देता है जो जोड़ों में जम जाते है। यह रोग अतिभार वाले रोगों मंे आमतौर पर पाया जाता है और इसके समानांतर अन्य रोग होने की संभावनाएँ अधिभार वाले व्यक्तियों में बढ़ जाती है।
गाल ब्लड़र रोग और गाल स्टोन:- यह रोग भी आम तौर पर भारी लोगों में पाया जाता है और जैसे-जैसे वजन बढ़ता जाता है रोग की संभावनाएँ भी बढ़ती जाती है फिर और कोलेस्ट्राॅल का साथ इस रोग के लिये कारण बन जाता है।
हायपरटेंशन:- जिसे उच्च रक्तचाप भी कहा जाता है। जब ब्लड़प्रेशर 140/90 या इससे अधिक होता है तो उसे हायपरटेंशन कहा जाता है। 65 से 80ः लोगों में हायपरटेंशन का कारण मोटापा पाया गया है। यह आर्टरीज पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने से होता है। इसके कारण अन्य हृदय संबंधी रोगों के होने की संभावनाएँ भी बढ़ जाती है।
स्ट्रोक:- स्ट्रोक दिमाग में ब्लड़ क्लाटिंग के कारण होता है। यह गलत खून दिमाग को कोलेस्ट्राॅल के कारण पहुंचता है। जब कोलेस्ट्राॅल का स्तर उच्च होता है तो यह हार्ट मंे जमने लगता है जो यहाँ से दिमाग की ओर बढ़ता है और स्ट्रोक का कारण बनता है। इसके कारण लकवा (पेरेलेसिस), साँस लेने में कठिनाई, मूर्छित अवस्था या अर्ध बेहोशी, कमजोरी आदि समस्याएँ जन्म ले लेती है।
इस प्रकार मोटापा व अतिभार मानव शरीर को अनेकों परेशानियों में डाल देती है जिससे बचाव करना मानव जीवन के लिये अति आवश्यक है

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