Sunday, 15 January 2017

डायबिटीज कण्ट्रोल करने के ऐसे नुस्खे जो आपको मदद करेंगे आपकी शुगर कण्ट्रोल करने में

डायबिटीज कण्ट्रोल करने के ऐसे नुस्खे जो आपको मदद करेंगे आपकी शुगर कण्ट्रोल करने में 



डायबिटीज के रोगियों की संख्या पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। भारत में 4.5 करोड़ लोग डायबिटीज के शिकार हैं। डायबिटीज होने का मुख्य कारण असंयमित खानपान, मानसिक तनाव, मोटापा, व्यायाम की कमी या अनुवांशिक हैं। डायबिटीज चयापचय से संबंधित बीमारी है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज का ऑक्सीकरण पूर्ण रूप से नहीं हो पाता है।

डायबिटीज से ग्रस्त लोगों को इस पर नियंत्रण रखने और निदान के लिए रोजाना कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। जैसे खान-पान और डाइट प्लान तैयार करें। साथ ही, हमेशा शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। समय-समय पर अपने ब्लड शुगर की जांच करते रहें और इसका रिकार्ड बनाकर रखें।

यह एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिस पर नियंत्रण शरीर को चुस्त दुरुस्त और सक्रिय बनाकर ही रखा जा सकता है। आदिवासियों की मानें तो कुछ देसी रामबाण नुस्खे ऐसे भी हैं जो डायबिटीज को हमेशा कंट्रोल में रखते हैं। चलिए आज जानते हैं ऐसे ही कुछ नुस्खों के बारे में.....
 गुजरात प्रांत के डांग जिले के आदिवासी बेल और सीताफल पत्तों के चूर्ण को समान मात्रा में मिलाकर एक चम्मच मात्रा में डायबिटीज के रोगियों के देते हैं। वे मानते हैं कि ये नुस्खा डायबिटीज में रामबाण का काम करता है।
डायबिटीज और इसके स्वदेशी उपचार के संदर्भ में रोचक जानकारियों का जिक्र कर रहें हैं डॉ. दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों, जैसे पातालकोट (मध्यप्रदेश), डांग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहे हैं।

 आदिवासी कटहल की पत्तियों के रस का सेवन करने की सलाह मधुमेह (डायबिटीज ) के रोगियों को देते हैं।
- आदिवासियों के अनुसार, नीम के गुलाबी कोमल पत्तों को चबाकर रस चूसने से डायबिटीज में आराम मिलता है।

- छुईमुई की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिली पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। यह काढ़ा पीने से डायबिटीज में बहुत राहत मिलती है।
- गिलोय चूर्ण की 15 ग्राम मात्रा को घी में मिलाकर सेवन करें। ये नुस्खा डायबिटीज के नियंत्रण में बहुत कारगर है।

- डायबिटीज रोगी के लिए दिनचर्या संतुलित होना आवश्यक है। सुबह जल्दी उठकर व्यायाम, योग के अलावा पैदल चलना, साइकिल चलाना और तैराकी जैसे काम फायदेमंद होते हैं। दिन भर खुद को व्यस्त रखना ही मधुमेह से निपटने का मुख्य मंत्र है। इनके अलावा कुछ देसी नुस्खे हैं, जिन्हें आजमाकर इस रोग पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

- भिंडी का पाउडर (5 ग्राम), इलायची (5 ग्राम), दालचीनी की छाल का पाउडर (3 ग्राम) और काली मिर्च ( 5 दाने) कूट कर मिश्रण तैयार कर लें। इस मिश्रण के तीन हिस्से करके रोजाना दिन में तीन बार गुनगुने पानी में मिलाकर सेवन करें।

- आदिवासियों के अनुसार, दो ग्राम दालचीनी चूर्ण और एक लौंग उबले पानी में डालकर ढककर रख दें। 15 मिनट बाद इस पानी को पिएं। रोजाना दो बार सुबह-शाम ऐसा करने से काफी तेजी से डायबिटीज पर नियंत्रण किया जा सकता है। आदिवासियों के अनुसार, जिन्हें अक्सर हाथ-पैर में सूजन की शिकायत रहती हो और अनियंत्रित शर्करा रहती हो, उन्हें ये नुस्खा जरूर आजमाना चाहिए।
- डांग (गुजरात) के आदिवासियों के अनुसार, 50 ग्राम गिलोय का ताजा रस प्रतिदिन दिन दो बार लें। यह डायबिटीज में फायदेमंद होता है।
- कच्ची फराशबीन की फलियों को खाने से शुगर काफी हद तक नियंत्रित हो सकती है। फराशबीन को कम तेल में आधा कच्चा रह जाए तब तक पकाएं। इन्हें चबाने से डायबिटीज कंट्रोल में रहती है। आधुनिक विज्ञान फराशबीन फलियों के रस से इंसुलिन नामक हार्मोन के स्राव होने का दावा करता है। इसलिए इसे मधुमेह (डयबिटीज) में उपयोगी माना जाता है।
- पातालकोट के हर्बल जानकार फराशबीन और पत्ता गोभी के रस को मिलाकर सेवन करते हैं। आदिवासियों का मानना है कि डायबिटीज को रोकने या हो जाने पर ठीक करने के लिए यह एक उत्तम उपाय है।

ये 8 चीजें आजमा कर देखें, कहते हैं इनको खाने से बुढ़ापा नहीं झलकता

ये 8 चीजें आजमा कर देखें, कहते हैं इनको खाने से बुढ़ापा नहीं झलकता





हेल्दी खाने के बहुत फायदे होते हैं। सही और संतुलित आहार लेकर न सिर्फ शरीर को स्वस्थ बनाया जा सकता है, बल्कि एजिंग साइन को भी रोका जा सकता है। खाने की कुछ चीजें ऐसी हैं जिनमें एंटी-ऑक्सीडेंट और फाइटोकेमिकल्स की भरमार होती है। ये अनेक बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। साथ ही, स्किन और बॉडी को हमेशा जवान बनाए रखने में भी सहायक होती हैं। आइए, आज जानते हैं कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में, जो स्किन को हमेशा जवान बनाए रखती हैं।


- पपीता को गुणों की खान कहा गया है। यह आपके पेट का भी ख्याल रखता है। साथ ही, त्वचा की खूबसूरती को भी बनाए रखता है। यह कई बीमारियों से दूर रखता है और इसका स्वाद भी बेजोड़ है। इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। इसलिए इसके नियमित सेवन से त्वचा हमेशा जवान बनी रहती है।

- दही में कई तरह के पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि दही में जीवित बैक्टीरिया होते हैं। ये पाचन में मदद करते हैं। कैल्शियम का अच्छे स्रोत होने के कारण ये ऑस्टियोपोरोसिस से बचाता है। साथ ही, स्किन को यंग बनाए रखता


 गोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स आदि रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इन सब्जियों में पाए जाने वाले बीटा कैरोटीन, आइसोथियोसायनेट्स (जो विशेष रूप से ब्रोकली में पाया जाता है) कैंसर को रोकने में मदद करते हैं। इनके नियमित सेवन से मनुष्य उम्रभर जवान दिखाई देता है।

- टमाटर में लाइकोपिन नामक तत्व पाया जाता है, जो एक तरह का कैरीटिनॉइड होता है। यह कैंसर प्रतिरोधकता उत्पन्न करता है। इसमें फ्यूमेरिक एसिड और क्लोरोजेनिक एसिड भी होता है। ये कार्सिनोजन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं। टमाटर खाने से स्किन हमेशा ग्लोइंग और यंग दिखाई देती है।

सेब और स्ट्राबेरी जैसे फलों में घुलनशील फाइबर होते हैं। ये ब्लड शुगर के लेवल को कम करते हैं। कैंसर कोशिकाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एंजाइम को अवरुद्ध कर देते हैं। साथ ही, इनमें प्रचुर मात्रा में एंटी-आक्सीडेंट पाए जाते हैं जो कि उम्र को थामे रखते हैं।

- सब्जियां जैसे कद्दू, आम, खुबानी, शकरकंद, में बीटा कैरोटीन और विटामिन सी और एंजाइम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये पाचन में सहायता करते हैं। साथ ही, त्वचा को जवान बनाए रखते हैं।
- सोया उत्पाद सोयाबीन, सोया का आटा, सोया दूध और टोफू आदि कम वसा और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। सोया उत्पादों में जेनिस्टीन होता है, जिसे कुछ विशेष तरह के कैंसर की को कम करने वाले कारक के रूप में देखा जाता है। ये शरीर को भी जवान और स्वस्थ बनाए रखते हैं।

- संतरा, मौसमी, अंगूर, नींबू आदि में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसमें बायोफ्लेवोनॉइड और लाइमोनीन भी मिलता है। अध्ययन के द्वारा यह पता लगाया जा चुका है कि ये कैंसर उत्पन्न करने वाले पदार्थों (कार्सिनोजन्स) को दूर करते हैं। इन सभी चीजों में एंटी-आक्सीडेंट पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।

Thursday, 12 January 2017

फैट को झट से घटा दे ये घरेलू तरीके

फैट को झट से घटा दे ये घरेलू तरीके

वजन कम करना और चर्बी को गला देना दोनों ही अलग अलग बातें हैं। आज कल हम तरह तरह के जंक फूड खाते रहते हैं , जिनमें खाघ पदार्थ और पोषण के नाम पर कुछ भी नहीं होता, लेकिन हां, इससे फैट खूब मिल जाता है। यही फैट आपके शरीर में जम जाता है जो कई दिनों तक रहने से विष का रूप ले लेता है। कुछ घरेलू उपायों से आप इस चर्बी तथा टॉक्‍सिन को अपने शरीर से निकाल सकते हैं। जब आप शरीर से इस फैट को निकालेगें तो आपके शरीर की सफाई भी होगी, जिससे पेट साफ रहेगा और त्‍वचा दमकने लगेगी। यह घरेलू उपचार हैं, जिनका कोई साइड इफेक्‍ट नहीं होगा और मोटापा भी अलग से दूर होगा। आप इन पेय को अपने घर पर ही बना सकते हैं। यह घरेलू पेय अभी से नहीं बल्कि कई दशको से अलग-अलग देशों में प्रयोग किये जाते आ रहे हैं। तो आइये देखते हैं कौन से हैं वे पेय जो शरीर से फैट को गला देते हैं।
नींबू, शहद और गरम पानी रोज सुबह खाली पेट इसे पीने से आपको पेट सही रहेगा, स्‍किन साफ रहेगी और मोटापा भी दूर रहेगा।
ग्रीन टी ग्रीन टी में एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि झुर्रियों को दूर रखती है। अगर आपको अपना मोटापा घटाना है तो ग्रीन टी को बिना चीनी मिलाए पियें।
लौकी जूस यह एक पौष्टिक सब्‍जी है। इसे पीने से पेट भर जाता है, इसमें फाइबर होता है और यह पेट को ठंडक पहुंचाती है। इसे पीने से घंटो तक पेट भरा रहता है और मोटापा भी कंट्रोल होता है।
एप्‍पल साइडर वेनिगर यह प्रूफ कर दिया गया है कि इसे पीने से मोटापा कम हो सकता है। आप एप्‍पल साइडर वेनिगर को पानी या जूस के साथ मिला कर पी सकते हैं। यह पाचन तंत्र को सही रखता है और कोलेस्‍ट्रॉल की समस्‍या से भी निजात दिलाता है।
धनिया जूस इस जूस को पीने से किडनी सही रहती है और मोटापा भी कंट्रोल रहता है। इसे पीने से पेट देर तक भरा रहता है और यह शरीर की शुद्धी करती है।
कैनबेरी जूस इसमें बहुत सारा विटामिन सी और एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि वेट लॉस करने में मदद करती है। इसके जूस में नींबू या सिरका मिला कर पीने से फैट बर्न होता है और साथ में टॉक्‍सिन से भी छुटकारा मिलता है।
मेपल सीरप और पानी मेपल सीरप को गरम पानी में मिलाएं और सुबह खाली पेट पियें। इस टिप को बॉलीवुड के कई सेलेब्रिटी भी करते हैं।
उबला सेब उबला हुआ सेब सेहत के लिये बहुत अच्‍छा होता है। इससे आपको फाइबर मिलेगा और आयरन भी। इसे पचाने में भी आसानी होती है और मोटापा भी घटता है।
डेन्‍डिलायन टी यह एक फूल की चाय होती है। बाजार में इसमें टी बैग भी मिल जाते हैं। इससे शरीर से अधिक मोटापा घटता है।
लाल मिर्च और अदरक ताजी अदरक को कूट कर उसमें लाल मिर्च मिला दें और इसका सेवन करें। यह दोनों मसाले मोटाप घटाने के लिये सबसे उत्‍तम उपचार हैं। यह फेफड़ों को भी साफ करते हैं और मोटापा भी घटाते हैं।
वजन कम करने के कुछ आसान घरेलू उपाय
अपने बढ़ते वजन पर ब्रेक लगाने के लिए आप क्या-क्या करते हैं? जिम में घंटों कसरत करते हैं, तरह-तरह के वेट लॉस पैकेज लेते हैं या फिर डाइटिंग के चक्कर में अपनी भूख मारते रहते हैं? हमारे पास आपके लिए कुछ ऐसे आसान घरेलू उपाय हैं जिन्हें आप अपने रुटीन में शामिल करके वजन पर नियंत्रण तो कर ही सकते हैं, साथ ही आपकी जेब भी ढीली नहीं होगी।
गर्म पानी के साथ शहद
रोजाना सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ शहद पीने से वजन घटाने में बहुत आसानी होती है। इससे शरीर में शुगर का लेवल मेनटेन रहता है और त्वचा भी दमकती है।
नींबू पानी
वजन घटाने के लिए रोज सुबह खाली पेट नींबू पानी का सेवन भी एक कारगर उपाय है। सर्दियों में जिन्हें ठंड या साइनस की समस्या है वे पानी को गुनगुना करके उसमें नींबू डालकर ‌पी सकते हैं।
टमाटर-दही का शेक
एक कप टमाटर के जूस में एक कप दही (फैट फ्री), आधा चम्मच नींबू का रस, बारीक कटा अदरक, काली मिर्च व स्वादानुसार नमक मिलाकर ब्लेंड कर लें। रोज एक ग्लास इस शेक को पीने से आपका वजन तेजी से गिरेगा।
खूब पानी पिएं
दिन में आठ से नौ ग्लास पानी पीने से भी वेट कम करने में मदद मिलती है। कई शोधों में माना गया है कि दिन में आठ से नौ ग्लास पानी से 200 से 250 कैलोरी आप बर्न कर सकते हैं।
ग्रीन टी
युनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में माना की ग्रीन टी में विशेष प्रकार के पोलीफेनॉल्स पाए जाते हैं जिससे शरीर में फैट्स को बर्न करने में मदद मिलती है।
करौंदे का जूस
करौंदे का जूस भी वजन घटाने में बहुत फायदेमंद है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और फैट्स कम करने में आसानी होती है

क्या आप जानते हैं की अपने आप को आप कैसे ठीक रख सकते हैं हर बिमारी से करे ये रोज़मर्रा के काम और रहिये स्वस्थ और तंदुरुस्त


कुछ जरूरी बातें


1. पानी हमेशा बैठकर घुट-घुट कर धीरे-धीरे पीना चाहिए /
2. पानी खाना खाने से ½ घंटे पहले तथा 1½ घंटे तक नही पीना चाहिए /
3. सुबह की शुरुआत उषापान से करे ,दिन में बिना प्यास पानी न पिये /
4. पानी कभी भी ठंठा नही पीना चाहिए /
5. खाना हमेशा बैठकर चबा चबाकर खाना चाहिए /
6. खाना सूर्योदय के 2½ घंटे बाद तक तथा सूर्यास्त से पहले खा लेना चाहिए /
7. खाना खाने के बाद कुछ पीने का मन करे तो सुबह के समय जूस ,दोपहर के समय लस्सी ,शाम के समय दूध पीना चाहिए /
8. सुबह का खाना सबसे भारी तथा शाम का सबसे हल्का करना चहिये /
9. खाना पकाने तथा स्टोर करने के लिए एलुमिनियम का पात्र सबसे खराब तथा मिटटी का पात्र सबसे अच्छा होता है /
10. खाना खाने के बाद कम से कम 10 मिनट वज्रासन में बैठना चहिये /
11. विदेशी गाय (अमेरिकन ,यूरोपियन सूअर ) से प्राप्त किसी भी प्रकार प्रोडक्ट इस्तेमाल न करें
12. आयोडीन युक्त समुंद्री नमक का प्रयोग न करके सेंधा ,काला ,ठेले वाले नमक प्रयोग करना चाहिए /
13. डालडा, रिफाईनड के स्थान पर कच्ची घानी का तेल प्रयोग करें /
14. चीनी के स्थान पर बिना मशाले का गुङ ,खांड ,देशी शक्कर का प्रयोग करें /
15. सूर्योदय के कम से कम 1½ घंटे पहले उठना चाहिए /
16. दांत साफ करने के लिए टूथपेस्ट का प्रयोग न करके मंजन और दातुन का प्रयोग करना चाहिए /
17. पूर्व तथा दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना चाहिए /
18. नशेड़ी ,माशाहारी,चरित्रहीन व्यक्ति के संग न रहें /
19. अपने 50 -100 किलोमीटर के दायरे में होने वाली फल सब्जी का ही प्रयोग करें तथा ऋतू (मौसम ) के अनुसार खाए /
20. जैविक अन्न,फल, सब्जी का इस्तेमाल करें

Saturday, 7 January 2017

संकेत जो साबित करते हैं कि हनुमान जी आज भी जीवित है!

संकेत जो साबित करते हैं कि हनुमान जी आज भी इस धरती पर कही न कही जीवित है! 


भगवान राम के भक्त हनुमान जी के बारे में कहा जाता है कि वह चिरंजीवी हैं। वे हर युग में पृथ्वी पर रहते हैं। वे सतयुग में भी थे ,रामायण काल में भी थे और महाभारत काल में भी। यह भी कहा जाता है कि वह कलियुग में भी विराजमान है और उनके जीवित होने के संकेत मिलते हैं।

गोस्वामी तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा में उन्हें शंकर सुवन केसरी नंदन कहकर संबोधित किया है। त्रेतायुग में जब-जब श्रीराम ने हनुमानजी को गले से लगाया, तब-तब भगवान शंकर अति प्रसन्न हुए हैं। सतयुग में भोलेनाथ पार्वती से उनके स्वरूप का वर्णन करते हैं और वे उसी युग में पार्वती से दूर रहकर ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक श्रीहनुमानजी सतयुग में शिवरूप में थे और शिव तो अजर-अमर हैं। हनुमानजी के जीवित होने के प्रमाण समय-समय पर प्राप्त होते रहे हैं, जो इस बात को प्रमाणित करता है कि हनुमानजी आज भी जीवित हैं।
-पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक जहां भी भगवान राम की कथा होती है वहां हनुमान जी अवश्य होते हैं। इसलिए हनुमान की कृपा पाने के लिए श्री राम की भक्ति जरूरी है। जो राम के भक्त हैं हनुमान उनकी सदैव रक्षा करते हैं।
-शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि कुछ ऐसी आत्माएं हैं जिन्हें चिरंजीवी होने का वरदान प्राप्त है। इनमें एक नाम महावीर हनुमान जी का भी है। भगवान राम से वरदान पाने के कारण हनुमान जी अमर हो गए। तुलसीदास जी ने कलियुग में हनुमान जी की मौजूदगी का उल्लेख किया है और बताया है कि हनुमान जी की कृपा से ही उन्हें राम लक्ष्मण जी के दर्शन प्राप्त हुए।
- हनुमानजी कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं, ऐसा श्रीमद् भागवत में वर्णन आता है।
यत्र-यत्र रघुनाथ कीर्तन तत्र कृत मस्तकान्जलि।
वाष्प वारि परिपूर्ण लोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तक॥
अर्थात कलियुग में जहां-जहां भगवान श्रीराम की कथा-कीर्तन इत्यादि होते हैं, वहां हनुमानजी गुप्त रूप से विराजमान रहते हैं। सीताजी के वचनों के अनुसार- अजर-अमर गुन निधि सुत होऊ।। करहु बहुत रघुनायक छोऊ॥ ऐसा कहा जाता है कि यदि मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से इनका आश्रय ग्रहण कर लें तो फिर तुलसीदासजी की भांति उसे भी हनुमान और राम-दर्शन होने में देर नहीं लगती। इससे उनके हर काल में अजर-अमर होने का संकेत मिलता है।
-त्रेतायुग में तो पवनपुत्र हनुमान ने केसरी नंदन के रूप में जन्म लिया और वे राम के भक्त बनकर उनके साथ छाया की तरह रहे। वाल्मीकि ‘रामायण’ में हनुमानजी के संपूर्ण चरित्र का उल्लेख मिलता है। हनुमानजी के त्रेतायुग में होने के हजारों प्रमाण मिलते हैं। कहा जाता है कि श्रीराम, भरत, सीता, सुग्रीव, विभीषण और संपूर्ण कपि मंडल, कोई भी उनके ऋण से मुक्त अर्थात उऋण नहीं हो सकता। इस प्रकार त्रेतायुग में तो हनुमानजी साक्षात विराजमान हैं। इनके बिना संपूर्ण चरित्र पूर्ण होता ही नहीं।

Wednesday, 4 January 2017

गर्भावस्था में सावधानियां – न करें ये काम

गर्भावस्था में सावधानियां – न करें ये काम


गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर महिलाओं को सलाह देते हैं कि खुद और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हमेशा सावधान रहना चाहिए। यह सावधानी खाने-पीने की चीजों से लेकर अलग-अलग गतिविधियों में देखी जा सकती है। मां बनना जिंदगी के बेहतरीन अनुभवों में से एक है। इसी अनुभवों को जिंदा रखने के लिए कुछ सावधानी भी बरतनी पड़ती है। गर्भवती स्त्रियां अपनी दिनचर्या को नियमित करके तथा गर्भावस्था में अपने खाने पीने का ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखकर अपने होने वाले बच्चे को का ख्याल रख सकती हैं। अपने पिछले लेख में हमने बाताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किन-किन चीजों को नहीं खाना चाहिए। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि गर्भवती महिला को कौन-कौन से काम नहीं करना चाहिए।
मनोरंजन पार्क में सवारी
वाटर स्लाइड या अन्य सवारी करने से पहले इस बात का ध्यान दे कि जो आप करने जा रहे हैं उससे बेबी को नुकसान तो नहीं होगा। हमारी राय में इस तरह की सवारी करने से बच्चे को नुकसान हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह के खेल में सब चीज अचानक ही होता है। अब वह चाहे लैंडिग करना हो या फिर अचानक रुकना या फिर अचानक शुरू करना हो।
साइकिल से बनाए दूरी
अगर आप गर्भवती हैं, तो आपको साइकिल चलाने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इसमें संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। साइकिल चलाने के दौरान कोई भी दुर्घटना बेबी को नुकासन पहुंचा सकता है।
डुबकी लगाना
वैसे गर्भवस्था के दौरान तैराकी को अच्छा माना जाता है, लेकिन जब आप पूरे दबाव के साथ डुबकी लगाते हैं, तो ये चीज बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।
जिमनास्टिक्स
बतौर महिला आपको जिमनास्टिक्स का शौक है, लेकिन जब गर्भवती हैं तो इससे दूरी बना लें। क्योंकि इसमें गिरने का खतरा रहता है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है।
हॉर्स राइडिंग
आप घोड़े पर कितनी भी अच्छी सवारी कर लेते हो, लेकिन जब आप गर्भवती हैं तो आपको रिक्स लेने की जरूरत नहीं है। क्योंकि घोड़े के मूड का कोई भरोसा नहीं, कब आपको धोखा दे जाए। गर्भावस्था के दौरान ऐसा न करें।
टेनिस न खेलें
खुद को फिट रखने के लिए टेनिस बहुत ही अच्छा गेम है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान इस खेल से आप दूरी बनाएं। यह संतुलन का गेम है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसे न ही खेंले तो अच्छा है।
सर्फिंग और वाटरस्किंग
एक और चीज गर्भावस्था के दौरान आप न तो सर्फिंग करें और न ही वाटरस्किंग। ये रोमांचकारी गेम आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आप स्कूबा डाइविंग से भी दूरी बनाएं।

लो ब्लड प्रेशर का उपचार

लो ब्लड प्रेशर का उपचार

इस भागती जिंदगी में हर किसी को कोई तनाव जरूर है, जैसे किसी को हाई ब्लड प्रेशर हो जाता है तो किसी को लो ब्लड प्रेशर। चक्कर आना, आंखों के सामने अंधेरा हो जाना, थोड़ी देर के लिए बेहोश हो जाना आदि ये सारे लक्षण हैं ब्लड प्रेशर के। आपको भी अगर ऐसी समस्या है तो अपनाएं ये आसान से टिप्स।
-नमक को पानी में घोल बनाकर पी लें
-चक्कर जैसा अनुभव हो तो आप जहां कहीं भी हो वहां बैठ जाएं या सो जाएं।
-अपनी मुठ्ठियों को बार-बार खोले और बंद करते रहें।
-अपने पैरो को हिलाते रहें।
ऊपर दिये गए चार आसान से टिप्स के अलावा आप ये भी घरेलू उपचार अपना सकते हैं।
1. घर में किसमिस तो मौजूद होगा ही उसको रात में किसी कांच के बर्तन में भीगोकर रख दें और सुबह खा लें। हो सके तो किसमिस के साथ देसी चना को भी भीगो दें। सुबह दोनों को अच्छे से चबा- चबाकर खाएं।
2. छाछ तो आप पीते ही होंगे। उसमें बस नमक और भुना हुआ जीरा और हिंग मिलाकर पीने से आपका ब्लड प्रेशर हमेशा नॉरमल बना रहेगा।
3. दालचिनी के पाउंडर को हमेशा गर्म पानी के साथ लेने से भी आपका ब्ल्ड प्रेशर कभी लो नहीं रहेगा।
4. लो ब्लड प्रेशर में अक्सर चक्कर आने की समस्या रहती है, ऐसे में आप आंवले के रस में शहद को मिलाकर खाने से आपको बहुत जल्दी राहत मिलेगी।
5. अदरक को आप काट लें और फिर उसमें नींबू का रस और नमक मिलालर रख लें। अब इसे रोज खाना खाने से पहले थोड़ा खाते रहें। ब्लड प्रेशर आपका लो नहीं होगा।
6. टमाटर के रस में थोड़ी काली मिर्च और नमक डालकर पी लें। लो ब्लड प्रेशर होने पर इससे आपको राहत बहुत जल्द मिलेगा ।
7. चुकंदर भी आपके ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। कोशिश करें कि आप चुकंदर का जूस बनाकर पीयें।
8. अगर आप ठंड़े पानी से नहाते हैं तो यह आपके ब्लड प्रेशर के लिए सही नहीं रहेगा। इसलिए कोशिश करें कि आप गुनगुने पानी से नहाएं।
9. खाली पेट एक-दो चम्मच पानी में तुलसी का रस मिलाकर पियें, आपको आराम मिलेगा। इसे पीने के एक घंटे के बाद तक कुछ भी न खाएं।
10. हाई ब्लड प्रेशर में पपीता बहुत ही लाभदायक होता है इसलिए इसे रोजाना के डाइट में जरूर शामिल करें।
इन सभी घरेलू उपचार के अलावा आपको अपने खाने-पीने का सही ख्याल रखना चाहिए। साथ ही व्यायाम करने से भी ब्लड प्रेशर की कोई समस्या नहीं रहेगी। ध्यान रहे अधिक नमक और अधिक चीनी आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

पिंपल्स के लिए घरेलू उपाय

पिंपल्स के लिए घरेलू उपाय

हर कोई चाहता है सुंदर दिखना। सुंदर का मतलब यहां सिर्फ रंग गौरा से नहीं है बल्कि बिना कोई दाग धब्बा का चेहरा। आज की तारीख में लोग सबसे ज्यादा पिंपल्स से परेशान हैं। लड़का हो या लड़की हर कोई अपना चेहरा पिंपल्स से बचाना चाहता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इस दुनिया में हर इंसान क्लीन और क्लियर स्किन पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार है। यंगस्टर दो वक्त की रोटी भले कम खा लेंगे लेकिन स्किन को लेकर कॉम्प्रमाइज़ नहीं करेंगे।
सबसे बुरा तो तब लगता है जब आपके चेहरे पर अचानक किसी खास मौके (पहली डेट, ज़रूरी मीटिंग या शादी) के पहले पिंपल्स निकल आता है। आप पर क्या गुजरती होगी हम बखूबी समझ और जान सकते हैं। आखिर ये पिंपल्स आपके उस खास दिन को पूरा बर्बाद जो कर देते हैं। ऐसे में आपको ज़्यादा परेशान होने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है। जानना चाहेंगे आखिर कैसे?
आइए हम आपको बताते हैं ऐसे ही कुछ ट्राय एंड टेस्टेड ट्रिक्स जिनकी मदद से एक रात में आप पा सकते हैं पिंपल्स से छुटकारा :
बर्फ की मदद से: यह तो आप जानते हैं कि बर्फ की ठंडक ब्लड वेसल को टाइट करने के साथ-साथ रैशेज़ और किसी तरह के सूजन को भी कम करने में मदद करता है।
क्या करें – घर में रखा हुआ पतला कपड़ा निकाल लें अब इसमें एक आइस क्यूब बांध लें और अब इसे अपने पिंपल्स पर रख दें। ऐसा दिन-भर में 3 से 4 बार करें और फिर देखें कमाल।
लहसून से फायदा: जैसा की आप जानते हैं कि लहसून में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटीसेप्टिक प्रोपर्टीज़ मौजूद होती है, जो पिंपल्स को खत्म करने में बेहद असरदार होते हैं।
हैंगओवर के लक्षण और घरेलू उपाय
क्या करें – सबसे पहले लहसून की एक कली लें और फिर इसको दो हिस्सों में काट लें। अब इसे अपने पिंपल्स पर धीरे धीरे रगड़ें। रातभर के लिए इसे ऐसे ही रहने दें और सुबह पानी से अपने चेहरे को धो लें।
ऐसप्रिन: इसकी मदद से आपका पिंपल्स पलभर में दूर हो सकता है। यह पेनकिलर ऐसप्रिन, जिसमें एंटी-इंफ्लेमेंटरी प्रोपर्टी होने के साथ-साथ सैलिसाइलिक एसिड भी मौजूद होता है। इस कारण कोई भी ऐसा प्रोडक्ट जो एक्ने खत्म करने का दावा करता है उसमें ऐसप्रिन एक ज़रूरी इंग्रीडिएंट के तौर पर मौजूद होता है।
क्या करें – अनकोटेड ऐसप्रिन पिल्स 5-7 ले लें। अब इसे थोड़े से पानी में घोलकर पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को अपने प्रॉब्लम एरिया पर लगाएं और फिर 10 मिनट बाद इसे पानी से धो लें। आपको खुद-ब-खुद एहसास होगा कि आपके पिंपल्स के साइज़ और रेडनेस में कमी आ गई है।
शहद: एक और असरदार ट्रिक, जो रातों-रात आपको पिंपल्स की परेशानी से छुटकारा दिलाएगा वह और कोई नहीं बल्कि शहद है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल प्रोपर्टी मौजूद होती है, जो बैक्टीरिया को फैलने से रोकता है।
क्या करें – जहां जहां आपको पिंपल्स हुए हैं वहां पर थोड़ा शहद लगाएं और फिर इसे बैन्डेड से कवर कर दें। रात भर इसे ऐसे ही रहने दें और सुबह इसे हटाने के बाद चेहरे को धो लें और फिर देखें कमाल।

टीबी का घरेलू आयुर्वेदिक इलाज

टीबी का घरेलू आयुर्वेदिक इलाज

हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस या विश्व क्षयरोग दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के विषय में जागरूक करना है और क्षय रोग की रोकथाम के लिए कदम उठाना है।
साधारणतया लोग टीवी के नाम से भयभीत हो जाते हैं।टीवी छूत की बीमारी है जो धीरे-धीरे बढ़ती है। यदि इसे प्रारंभिक अवस्था में ही न रोका गया तो जानलेवा साबित होता है।
टी.बी. रोग को हम फेफड़ों का रोग भी कहते हैं। यह बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण फेफड़े सहित रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य भागों में भी फैलता है -जैसे हड्डियाँ, हड्डियों के जोड़, लिम्फ ग्रंथियां, आँत, मूत्र व प्रजनन तंत्र के अंग, त्वचा और मस्तिष्क के ऊपर की झिल्ली आदि।
कैसे फैलती है टीबी 
जब हम सांस लेते हैं तो टीबी के बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। यह बैक्टीरिया किसी रोगी के खांसने, बात करने, छींकने, थूकने और मुंह खोलकर बोलने की वजह से बैक्टीरिया के रूप में कई घंटों तक हवा में रहते हैं और स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में सांस लेते समय प्रवेश करके रोग पैदा करते हैं। रोग से प्रभावित अंगों में छोटी-छोटी गांठ अर्थात टयुबरकल्स बन जाते हैं। उपचार न होने पर धीरे-धीरे प्रभावित अंग अपना कार्य करना बंद कर देते हैं और यही मृत्यु का कारण हो सकता है।
टीबी उस धूल में भी पाये जाते हैं जिसमें रोगी की लार, श्लेष्मा, नाक, थूक आदि मिली रहती है। संक्रमित पानी तथा भोजन से भी ये मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसके अलावा बीमार दुधारू पशुओं का दूध पीने से भी टीबी के बैक्टीरिया व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
भारत में टीबी 
संक्रामक बीमारी होने की वजह से टीबी से हर साल लाखों लोग शिकार होते हैं। भारत में भी इस बीमारी से हर तीन ‍मिनट में दो मरीज अपना दम तोड़ दे‍ते हैं।
टीबी का घरेलू उपचार
  1. लहसुन की दो-तीन कलियां सुबह कच्ची चबाएं।
  2. शहद व मक्खन शरीर के क्षय को रोकते हैं। सौ ग्राम मक्खन लेकर उसमें पचीस ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर रोजाना सेवन करें।
  3. भोजन करने के बाद लौंग का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटें।
  4. एक पांव दूध में पांच पीपल डालकर उबालें। फिर इस दूध को सुबह-शाम समय पियें।
  5. लहसुन के रस के साथ आधा चम्मच शहद मिलाकर चाटें तथा लहसुन के रस को सूंघें। यह रस फेफडों को मजबूत करता है।
  6. टीबी रोगी रोजाना सौ-दो सौ ग्राम अंगूर का सेवन करें।
  7. केला खाने से टीबी के रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
टीबी का आयुर्वेदिक उपचार
  1. करेले का एक चुटकी चूर्ण शहद के साथ चाटने के बाद ऊपर से वासावलेह का सेवन करें।
  2. पीपल पांच ग्राम, पीपलामूल पांच ग्राम, धनिया चार ग्राम, अजमोद पांच ग्राम, अनारदाना पचास ग्राम, मिसरी पचीस ग्राम, काली मिर्च पांच ग्राम, बंशलोचन दो ग्राम, दालचीनी दो ग्राम और तेजपात आठ-दस पत्ते। सबका चूर्ण बना लें इसमें से आधा चम्मच चूर्ण रोजाना शहद, बकरी या गाय के दूध के साथ सेवन करें।
  3. च्यवनप्राश दस ग्राम सुबह-शाम गरम दूध से लें।
नोट: ये सभी घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय किसी विशेषज्ञ की सलाह से लें।

Tuesday, 3 January 2017

खाँसी का घरेलू और आयुर्वेदिक इलाज

खाँसी का घरेलू और आयुर्वेदिक इलाज


साधारण तौर पर खाँसी होने का मतलब है कि हमारा श्वासन तंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा है। यह गले में हो रही खराश और उत्तेजना की सहज प्रतिक्रिया होती है। खाँसी का उपचार जल्दी हो जाना बेहतर है। आयुर्वेद में खाँसी का स्थायी उपचार भी मौजूद हैं। आयुर्वेद के अनुसार जब कफ सूखकर फेफड़ों और श्वसन अंगों पर जमता है तो खासी होती है। तीव्र खाँसी अचानक शुरू होती है। यह आम तौर से दो या तीन हफ़्तों में ठीक हो जाती है।
आयुर्वेदिक और कुछ घरेलू उपचार
375 मिलीग्राम भिगोया हुआ सुहागा शहद के साथ रात में लेने से या मुनक्के और मिश्री को मुँह में रखकर चूसने से खाँसी में लाभ मिलता है।
हींग, त्रिफला, मुलहठी और मिश्री को नींबू के रस में मिलाकर लेने से खाँसी कम करने में मदद मिलती है।
आधा तोला अनार की सूखी छाल बारीक कूटकर, छान लें। उसमें थोड़ा कपूर मिलायें। दिन में दो बार यह चूर्ण पानी के साथ मिलाकर पीने से भयंकर और कष्टदायी खाँसी मिटती है।
पान का पत्ता और थोड़ी अजवायन पानी में चुटकी भर काला नमक व शहद मिलाकर लेना भी खाँसी में लाभदायक होता है। विशेष रूप से यह बच्चों के लिए लाभकारी है।
सूखी खाँसी के उपचार के लिए एक छोटे से अदरक के टुकड़े को छील लें। इस पर थोड़ा नमक छिड़क कर उसे चूसें।
तुलसी के पत्तों का सार, अदरक और शहद मिलाकर एक मिश्रण बना लें। ऐसी गंभीर खाँसी के उपचार के लिए लें जो कि तपेदिक और ब्रौन्काइटिस जैसी बीमारियों के कारण शुरू हुई है।
गुनगुने पानी से गरारे करने से गले को भी आराम मिलता है। इससे खाँसी भी कम होती है। इसके अलावा सूखी खाँसी में काली मिर्च को पीसकर घी में भूनकर लेना भी फायदेमंद होता है।
इलायची और लौंग चबाने से खाँसी और उसकी उत्तेजना से राहत मिलती है। इन सब उपायों को व्यवहार में लाकर खाँसी से आराम मिल सकती है

कपूर और सरसों के तेल के फायदे

कपूर और सरसों के तेल के फायदे


सरसों के तेल का इस्तेमाल हम अक्सर अपनी रसोई में करते हैं। इससे न सिर्फ हमारी सब्जी में अच्छी बनती है बल्कि यह हमारी सेहत के लिए भी बहुत ही फायदेमंद होता हैं। इसलिए हम इसका उपयोग खाने के साथ-साथ दवा के रूप में भी करते हैं। सरसों के तेल में कई तरह के पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं जो हमारी सेहत के साथ-साथ हमारे बालों और हमारी स्किन के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। सरसों के तेल को हम अक्सर पेनकिलर के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। आज हम आपको कपूर और सरसों के तेल के फायदे बताते हैं…

  • दर्दनाशक गुण
    सरसों के तेल में दर्दनाशक गुण पायें जाते हैं इसलिए जब भी हमें कान का दर्द सताता है, तो इसे थोड़ा गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है। इसमें आप लहसुन की कलियों को डाल कर अच्छी तरह से काला कर लें। फिर इसे गुनगुना करने के बाद अपने कान में डालें आप के कान का दर्द ठीक हो जाता है।
  • सौन्दर्य को निखारे
    सरसों के तेल से हमारा सौन्दर्य निखरता है। इसके लिए थोडा बेसन, सरसों के तेल की कुछ बुँदे, हल्दी मिलाकर उबटन तैयार करें। फिर उसे अपने चेहरे पर लगाएं थोड़ी देर बाद अपना चेहरा साफ़ पानी से साथ धो लें। आप का चेहरा साफ़ हो जाएगा।
  • दिल के लिए
    सरसों के तेल का सेवन करने से हमारा दिल चुस्त दरुस्त रहता है, साथ में जो लोग सरसों के तेल का सेवन करते हैं। उन्हें दिल की बीमारी का सामना नहीं करना पड़ता।
  • गठिया से राहत
    जिन लोगों को गठिया होता है या गठिये से परेशान होते हैं। उन्हें सरसों के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करनी चाहिए। ऐसा करने से उन्हें राहत मिलती है ।
  • कमर दर्द के लिए
    अक्सर सर्दियों के दिनों में कमर में दर्द होने लगता है। ऐसे में हमें सरसों के तेल में थोड़ी हींग, अजवाइन, और लहसुन की कलियाँ लेकर उसे गर्म करें, फिर उसे कमर पर लगाएं। ऐसा करने से आप का कमर दर्द ठीक हो जाएगा।
  • नवजात शिशु की मालिश
    नवजात शिशु की सरसों के तेल से मालिश करनी चाहिए। इससे उसे ठंड का सामना नहीं करना पड़ता ।
  • त्वचा के रोगों के लिए
    सरसों का तेल त्वचा के रोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। जब भी हमे त्वचा के रोग जैसे दाद, खुजली, खाज आदि का सामना करना पड़ता है, तो हमें आक के पत्तों का रस, हल्दी और सरसों के तेल मिलकार गर्म करना चाहिए और ठंडा होने पर इसे लगाना चाहिए। इससे आप को राहत का एहसास होगा।
  • कील मुंहासे से बचाता है
    जब भी हमारे चेहरे पर कील मुंहासे या झुरियां पड़ जाती है, तो हमें सरसों के तेल से चेहरे की मालिश करनी चाहिए। इससे हमारा चेहरा साफ़ हो जाता है।
  • बालों के लिए
    सरसों के तेल से बालों में मालिश करने से बाल लंबे होते हैं। जब भी हमारे बाल झड़ते हैं, तो सरसों के तेल में थोडा हीना पाउडर डालकर उसे उबाल लेना चाहिए। ठंडा होने पर उसे अपने बालों में लगाना चाहिए। इससे बाल झड़ना बंद हो जाते हैं ।
  • थकान को दूर करें
    जब भी हम थके हुए होते हैं, तब सरसों की तेल से मालिश करने से हमारी थकान दूर हो जाती है साथ में हमारे शरीर में स्फूर्ति आती है और हमारे शरीर का खून बढ़ता है।
  • दांतों के लिए
    दांतों में दर्द होने पर सरसों के तेल में थोडा नमक डालकर अपने दांतों और मसुडो पर लगाने से आप को दर्द से राहत मिलती है साथ में मसुडो से खून निकलना बंद हो जाता है।
  • आँखों के लिए
    रात को सोने से पहले अपने पैरों के तलवों पर मालिश करने से आँखों की कमजोरी दूर होती है।
  • अस्थमा में उपगोयी
सरसों के तेल में कपूर को डालकर अच्छे से गर्म करें फिर उसकी मालिश अच्छे से पीठ और सीने पर करें, ऐसा करने से अस्थमा का घरेलू उपचार होता है ।

मुल्तानी मिट्टी के फायदे – सुंदरता के लिए

मुल्तानी मिट्टी के फायदे – सुंदरता के लिए


\अपनी त्वचा को सुंदर बनाने के लिए आप बाजार में उपलब्ध ढेरों उत्पाद पर यकीन करके उसका इस्तेमाल करने लगते हैं। आपकी कोशिश रहती है कि आपकी त्वचा हर समय निखरे। देखा गया है कि जब कमर्शियल प्रोडक्ट आपकी स्किन को सुंदर और मुलायम नहीं बना पाते तो, आप प्राकृतिक उपचारों का सहारा लेने लगते हैं। उन्हीं प्राकृतिक उपचारों में से एक मुल्तानी मिट्टी है। आज बाजार में भले ही त्वचा संबंधित बहुत सारे प्रोडक्ट हैं, लेकिन एक समय था जब लोग मुल्तानी मिट्टी को ही साबुन, शैंप्यू और क्रीम मानकर लोग अपने बदन और चेहरे पर लगाते थे। मुल्तानी मिट्टी एक ऐसा प्राकृतिक उपचार है जो त्वचा और बाल दोनों को स्वस्थ और सुंदर बनाये रखने में बहुत मदद करता है। इससे डेड स्किन भी साफ हो जाता है।
प्राकृतिक खूबसूरती को निखारने वाली इस मुल्तानी मिट्टी को हर व्यक्ति इस्तेमाल कर सकता है। यह ज्यादा महंगी नहीं होती है और बाजार में आसानी से मिल जाती है। इसे सस्ता और कारगर ब्यूटी सॉल्यूशन माना जाता है। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में…
अतिरिक्त ऑयल को करता है कम
गुलाब जल और मुलतानी मिट्टी का पेस्ट प्रयोग करने से चेहरे पर निखार आता है। इस पेस्ट को लगाने से चेहरे पर मौजूद अतिरिक्त ऑयल साफ हो जाता है।
दाग-धब्बे को करता है दूर
चेहरे पर दाग-धब्बे आपकी सुंदरता को बाहर नहीं आने देते। ऐसी स्थिति में आपको मुल्तानी मिट्टी के साथ पुदीने की कुछ पत्तियां और कुछ मात्रा में दही मिला लीजिए। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं।
चेहरे के दाग-धब्बे को दूर करना है तो आप मुल्तानी मिट्टी के साथ चंदन पाउडर में एक चम्मच टमाटर का रस मिला लीजिए और इसका पेस्ट बना लीजिए। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं।
त्वचा को बनाए मुलायम
अपने रुखी त्वचा को मुलायम तथा साफ करना है तो रातभर भिगोए हुए दो बादाम को पीसकर उसमें मुल्तागनी मिट्टी और जरूरत के हिसाब से दूध डाल कर पेस्टप बनाएं। इसे चेहरे पर लगाने से चेहरा मुलायम और साफ बनता है।
टैनिंग वाली त्वेचा के लिये
टैनिंग वाली त्वेचा के लिये मुल्तागनी मिट्टी और नारियल तेल को मिलाएं और उसमें थोड़ी सी चीनी मिलाएं। फिर इसे चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर बाद इसे हल्केो हाथों से रगड़ कर छुड़ाएं।
खुरदरी त्वचा को करे दूर
खुरदरी त्वचा से हर कोई परेशान रहता है। इसके लिए आप आधा चम्मरच मुल्ताेनी मिट्टी, 1 चम्मआच दही और एक अंडे का सफेद भाग लीजिए। इसे मिलाकर चेहरे पर 20 मिनट तक लगाइये। फिर गरम पानी से धो लें।
झाइयां मिटाने के लिये
मुल्ता नी मिट्टी और घिसी गाजर तथा 1 चम्ममच जैतून तेल मिक्सन कर के चेहरे पर लगाएं। झाइयां मिटाने में सहायता मिलेगी।

Sunday, 1 January 2017

गर्दन का दर्द – घरेलू उपाय

गर्दन का दर्द – घरेलू उपाय


जैसे की हम जानते हैं कि इस भागदौड़ भरी जिंदगी हमारे पास इतना समय नहीं है कि न तो हम अच्छे से सो सकते हैं न ही खा सकते हैं। ऐसे में हम पूरा दिन काम करते रहते हैं, फिर गर्दन में दर्द होने लगता है। जिससे न तो हम अच्छे से कोई काम कर सकते हैं और न ही उठ-बैठ सकते हैं। इसको कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इससे हमें ओर भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब गर्दन में दर्द हो तो अपनी गर्दन को बाएं और दाएं घुमाना चाहिए, ऐसा करने से भी गर्दन की अकडन निकल जाती है और हमारा दर्द ठीक हो जाता है। गर्दन की दर्द कोई गम्भीर बीमारी न हो, तो हम उसे कुछ घरेलू उपाय और योग आसन के द्वारा ठीक कर सकते हैं।
गर्दन के दर्द में घरेलू उपचार
जब आप रात को अच्छे से नहीं सोते या फिर आप हार्ड बिस्तर पर सोते हो, तो आप के गर्दन में दर्द होने लगता है, इसके लिए आपको कुछ घरेलू उपचार करने चाहिए, जिससे आप का दर्द कम हो सकें। वो घरेलू नुस्खे कुछ इस प्रकार से है…
आइस लगायें
जब भी आपके गर्दन में दर्द हो तो, आप बर्फ के टुकड़े किसी कपड़े में बांध लें और दर्द वाली जगह पर लगाएं। ऐसा करने से आप को राहत महसूस होगी।
अदरक का उपयोग
अदरक एक दर्द निवारण दवा के रूप में काम करती है। इसका प्रयोग करने के लिए गर्म पानी में इसे घिसकर इसका लेप बनाकर दर्द वाली जगह पर लगाएं। दर्द ठीक हो जाता है। अदरक का पाउडर बनाकर पानी के साथ लेने से भी दर्द ठीक हो जाता है।
गर्म सिकाई
चोट के कारण आप को दर्द हो रहा है, तो आप उसपर गर्म सिकाई कर सकते हैं। सिकाई करने से आप का जमा खून पिघलने लगता है। ऐसे में आप को दर्द से भी राहत मिलती है।
मसाज करना
जब भी आप को दर्द हो रही हो तो आप को मसाज करनी चाहिए लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दर्द वाली जगह पर जोर से मसाज न करे क्योंकि ऐसा करने से आप को और दर्द हो सकती है।
गर्म पानी का इस्तेमाल
गर्दन का दर्द होने पर अगर आप गर्म पानी के साथ स्नान करते हैं तो जैसे पानी गर्दन के साथ लगता है, तब आप को फर्क खुद ही महसूस होने लगता है।
हीग और कपूर का इस्तेमाल
गर्दन के दर्द होने पर हींग और कपूर को बराबर मात्रा में पीसकर सरसों के तेल में मिला लें, फिर इस पेस्ट को लेकर धीरे-धीरे अपनी गर्दन पर मसाज करें। कुछ समय के बाद आप का दर्द कम हो जायेगा।
सही मुद्रा
अगर आप अपने शरीर को सही मुद्रा में रखते हो, तो आप को गर्दन के दर्द को ठीक करने में बहुत ही सहायता मिलती है। अपने शरीर को सीधा दीवार के साथ खड़ा कीजिये और अपनी पीठ को दीवार के साथ चिपका दें। इस मुद्रा में कुछ देर रह सकते हैं।

मुंहासे होने के कारण और हटाने के उपाय

मुंहासे होने के कारण और हटाने के उपाय

आज के समय में लड़का हो या लडकी हर किसी को किसी चीज की प्रवाह हो या न हो, लेकिन वो अपने चेहरे का बहुत ही अच्छे से ख्याल रखते हैं, ऐसे में अगर उनके चेहरे पर किसी तरह का कोई दाग या कील- मुंहासा आ जाता है, तो वो अक्सर परेशान हो जाते हैं। यह अक्सर सफेद, काले और जलन पैदा करने वाले लाल रंग में दिखाई देते हैं। जब यह चेहरे पर हो तो चेहरा खराब हो जाता है, इसलिए आज हम जानेंगे मुंहासे होने के कारण और हटाने के उपाय। यह कील-मुंहासे टीनएज या युवावस्था में होते हैं। जब यह चेहरे पर आते हैं, तो इन्हें दूर करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। कई बार इन मुंहासों के कारण चेहरे पर दाग- धब्बे रह जाते हैं।
मुंहासे को बहुत से रूपों में देखा जा सकता है, जैसे कि पस वाले मुंहासे, बिना पस वाले मुंहासे, काले खूटें आदि। जब यह चेहरे पर निकलते हैं तो इनका रूप छोटे छोटे दानों जैसा होता है। यह गालों और नाक पर अधिक मात्रा में होते हैं। कुछ मुंहासे काले होते हैं, जिन्हें कील कहा जाता है।

मुंहासे होने के कारण

जब भी हमारा चेहरा मुंहासो के कारण खराब हो जाता है तो इसके बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे कि :-
  1. हार्मोन में गड़बड़ी होना या फिर हार्मोन में सही से मेल न होना।
  2. त्वचा में सफाई का न करना।
  3. चेहरे पर क्रीम, तेल या फिर चिकनाई युक्त पदार्थ का लगाना।
  4. चेहरा अधिक तेलिया होना।
  5. अधिक मात्रा में वसा का सेवन करना।
  6. खाने पीने की गलत आदत होना।
  7. सूरज की किरणों में अधिक रहना।

मुंहासे हटाने के उपाय

  • गंदे हाथों को चेहरे से रखें दूर
    जब भी हमारा चेहरा खराब होता है या चेहरे पर फुन्सियां हो जाती है, तो इसका सबसे बड़ा कारण होते हैं हमारे गंदे हाथ। हाथों में जीवाणु और बैक्टीरिया होते हैं जो हमारी त्वचा को खराब कर देते हैं। इसलिए जब भी अपने हाथों को चेहरे से लगायें तो हाथों को पहले अच्छे से साफ कर लें।
  • दूध से बनी चीजों का कम उपयोग
    अगर आप के चेहरे पर मुंहासे हैं तो आपको दूध या दूध से बनी हुई चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
  • वसायुक्त खाने से बचें
    जब भी हम वसा का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, तो हम अक्सर मोटे हो जाते हैं, जिसका सीधा असर हमारे चेहरे पर पड़ता है।
  • अधिक मात्रा में पानी का सेवन
    मुंहासों को दूर करने के लिए सर्वोत्तम उपाय है पानी का सेवन। जितना आप पानी का सेवन करते हैं, उतना ही हमारा शरीर स्वस्थ्य रहता है। पानी को अधिक पीने की बजाय थोड़ा थोड़ा करके पीना चाहिए।
  • चेहरे को साफ रखें
    अगर आप चाहते हैं कि आप का चेहरा साफ़ रहे उस पर कील मुंहासे न हो तो उसे पानी के साथ अच्छे से साफ़ करना चाहिए और धूप के साथ प्रदूषण से भी उसे बचा कर रखना चाहिए।
इसके अलावा आप मुंहासों को दूर करने के लिए कुछ घरेलू उपाय भी कर सकते हो
  1. त्वचा को साफ करने के लिए कच्चे दूध में नींबू डालकर रूई के साथ साफ करें, ऐसा करने से आपके चेहरे से सारी गंदगी दूर हो जाती है और चेहरा साफ हो जाता है।
  2. मुल्तानी मिट्टी में नींबू रस में टमाटर को मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं, सूखने के बाद अपना चेहरा साफ पानी के साथ धो लें।
  3. दो चम्मच मसूर की दाल का पाउडर, चुटकी भर हल्दी, नींबू की कुछ बूंदे, थोड़ा सा दही मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें और बाद में अपने चेहरे पर लगाएं, सूखने पर गुनगुने पानी के साथ अपना चेहरा साफ करें।
  4. एक बड़ा चम्मच तुलसी के पत्तो का पाउडर, नीम के पत्तो का पाउडर, एक चम्मच हल्दी पाउडर, थोड़ी से मुल्तानी मिट्टी का पाउडर मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें और अपने चेहरे पर लगायें। इसको सप्ताह में दो बार लगाने से आप का चेहरा साफ़ व कोमल हो जाएगा।
  5. अपने बालों की देखभाल करें और उनको साफ़ रखें।